April 20, 2018, 5:07 am
कहानी ख़त्म नहीं हुई, सलमान और अन्य सितारे अब भी कानून के घेरे में

कहानी ख़त्म नहीं हुई, सलमान और अन्य सितारे अब भी कानून के घेरे में

सलमान खान को ज़मानत मिलने के बाद देशभर में जश्न का माहौल देखा गया। मुंबई में उनके घर के सामने आतिशबाज़ी की गई। मीडिया ने कुछ इस तरह से दिखाया जैसे सलमान को बेल नहीं बाइज़्ज़त बरी किया गया हो। इस सारे शोर-शराबे में कई महत्वपूर्ण मुद्दे मीडिया भूल गया। जिस ढंग से इस मामले को पेश किया जाना था, वैसे नहीं किया गया।काले हिरणों की हत्या के चर्चित मामले में जोधपुर की अदालत ने सलमान खान को पांच साल की सजा सुनाई और सोनाली बेंद्रे, सैफ अली खान, तब्बू और नीलम को बरी कर दिया। लेकिन यह नहीं है कि उन्हें बाइज्जत बरी किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के कई आदेश हैं जिनमें कहा गया है कि बेल एंड नॉट जेल के आधार पर निर्णय लेना होता है।यह भी ध्यान रखना पड़ेगा कि चिंकारा मारने के केस में और मुंबई के हिट एंड रन केस में निचली अदालतों के फैसलों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल है। ये मामले यही बताते हैं कि सलमान में बार-बार अपराध करने की प्रवृत्ति है। सजा सुनाने वाले जज का कहना है कि सलमान एक पब्लिक फिगर हैं इसलिए उन्हें जिम्मेदारी से पेश आना चाहिए था। एक पब्लिक फिगर होने के नाते जिसे एक आदर्श पेश करना चाहिए वह यदि आपराधिक प्रवृत्ति प्रकट करता है तो उसका गुनाह औरों के मुकाबले और अधिक गंभीर हो जाता है। सलमान के साथ इस मामले में बरी किये गए अन्य कलाकार अभी पूरी तरह से मुक्त नहीं माने जा सकते हैं। जब तक ऊपरी अदालतों का फैसला नहीं आता तब तक उन पर भी तलवार लटकती रहेगी।यह हैरानी की बात है कि सलमान के गुनहगार सिद्ध होने के बाद एक तरह से पूरी फिल्म इंडस्ट्री उनके साथ खड़ी दिख रही है। जिस इंडस्ट्री को उनकी आलोचना करनी चाहिए वही उनके प्रति संवेदना जता रही है। ऐसे रवैये से इस इंडस्ट्री की छवि को सिर्फ नुकसान ही होगा। एक गंभीर बात यह भी है कि सलमान के मामलों की तफ्तीश में पुलिस ने गलतियां की हैं। हिट एंड रन केस में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि पुलिस कई जगह चूक गई जिसके कारण आरोप साबित नहीं हो पाए।यदि पुलिस ने हिट एंड रन केस की तफ्तीश सही से की होती तो नतीजा कुछ और होता।