April 20, 2018, 5:06 am
मध्यप्रदेश कांग्रेस गुटबाज़ी से ही नहीं उभर पा रही है

मध्यप्रदेश कांग्रेस गुटबाज़ी से ही नहीं उभर पा रही है

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अब बहुत कम वक्त रह गया है और अब तक कांग्रेस सत्तारूढ़ भाजपा के लिए कोई बड़ी चुनौती पेश करने में नाकाम सिद्ध हुई है। अब तक कांग्रेस एक भी ऐसा मुद्दा नहीं ला सकी है, जिसके दम पर वह सरकार बनाने की स्थिति में आ सके। आपसी फूट से अब तक उबर नहीं पा रही कांग्रेस के लिए बुरी खबर ये है कि उसके प्रदेश अध्यक्ष भी कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा सके हैं। मध्य प्रदेश में राहुल गांधी के ट्रंप कार्ड माने जा रहे प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया फेल होते नजर आ रहे हैं। राज्य में चौदह साल से वनवास काट रही कांग्रेस की सत्ता में वापसी का राहुल गांधी फार्मूला कमजोर साबित हो रहा है। राहुल गांधी ने एक साल पहले प्रदेश प्रभारी के रूप में दीपक बावरिया की नियुक्ति की थी लेकिन अब तक वे प्रदेश के नेताओं में एकजुटता का भाव पैदा करने में नाकाम रहे हैं। शुरुआत में बावरिया ने प्रदेश के नेताओं को साथ लाने के लिए बहुत प्रयास किये थे लेकिन अब उनकी सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है। अब तो बावरिया की बैठकों में पार्टी के नेता ही नजर नहीं आ रहे है न ही पार्टी आयोजन में शामिल हो रहे है। बावरिया अपनी बेबसी खुद कई बार मीडिया में बयां कर चुके हैं। वे प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कांतिलाल भूरिया, विवेक तन्खा जैसे बड़े नेता उनकी बैठक में आते ही नहीं हैं। बजट सत्र के दौरान बावरिया ने भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति बनाई लेकिन प्रदेश के कांग्रेस नेताओं के पास इस घेराव के लिए समय ही नहीं था। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बुजुर्ग नेताओं को टिकट न देने का फार्मूला दिया लेकिन इसका सख्त विरोध किया गया। मध्यप्रदेश के कांग्रेसी नेता चाहते ही नहीं कि यहाँ पुरानी परंपराओं को तोड़कर नई परिपाटी स्थापित की जाए। साफ जाहिर होता है कि राहुल गांधी तो मध्यप्रदेश कांग्रेस को सिरे से बदलना चाहते हैं लेकिन यहाँ के स्थानीय नेता अपना वर्चस्व किसी भी कीमत पर गंवाना नहीं चाहते। यहीं कारण है कि नियुक्ति के बाद से ही प्रदेश अध्यक्ष की अवहेलना की जा रही है। कुल मिलाकर प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के रसूख और अपनी-अपनी सियासत के कारण बावरिया अब बुरे फंसे नजर आ रहे है और आलम ये है कि चुनाव से पहले राहुल गांधी का एमपी में बावरिया फार्मूला फ्लाप होता नजर आ रहा है।