April 20, 2018, 5:07 am
दस अप्रैल को नहीं है भारत बंद, सभी संगठनों ने एक स्वर में किया इंकार

दस अप्रैल को नहीं है भारत बंद, सभी संगठनों ने एक स्वर में किया इंकार

10 अप्रैल को सर्वणों की ओर से घोषित किये गए भारत बंद की सूचना फर्जी पाई गई है। इस फर्जी खबर को लेकर सरकार बहुत गंभीरता दिखा रही है। सवर्ण समाज की ओर से देशभर में कहीं भी बंद का आव्हान नहीं किया गया है तो ये खबर कहाँ से निकलकर आ रही है। इसके लिए पुलिस देश के विभिन्न शहरों में आम नागरिकों के साथ लगातार बैठक कर रही है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी से बचा जा सके। अब आरक्षण के खिलाफ 10 अप्रैल को भारत बंद के आह्वान पर भड़काऊ मैसेज और गाना वायरल हो गया है। कोई नहीं जानता कि इस तरह का षड्यंत्र कौन कर रहा है। भारत बंद के आयोजन से विभिन्न संगठन इन्कार कर चुके हैं। पुलिस-प्रशासन नहीं चेता तो सोशल मीडिया पर निकाली जा रही भड़ास फिर से सौहा‌र्द्र में खलल डाल सकती है। दो अप्रैल को हुए उपद्रव के बाद से ही सोशल मीडिया पर अब 10 अप्रैल को आरक्षण के विरोध में भारत बंद का संदेश वायरल हो गया था। मैसेज में न किसी व्यक्ति का नाम है और न किसी संगठन का जिक्र। ऐसे मैसेज सिर्फ जातिगत आधार पर जहर घोलने का काम कर रहे हैं। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने शनिवार को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, सिंह सेना, राजपूत महासभा, हिंदू स्वाभिमान संस्था, संयुक्त ब्राह्मण संघर्ष समिति, राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति, जिला जाट महासभा और अखिल भारतीय ओबीसी महासभा मध्य प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। सभी संगठनों ने 10 अप्रैल को भारत बंद जैसा कोई आयोजन होने से साफ इन्कार कर दिया। सभी संगठन इस बंद को समर्थन देने से मना कर चुके हैं। सरकार और पुलिस अब ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मैसेज का स्त्रोत क्या है, इसे कहाँ से वायरल किया गया था। साफ़ है कि देश विरोधी ताकते अब सामान्य वर्ग को मोहरा बनाकर देश में अशांति पैदा करना चाहती है। आगामी दस अप्रैल को देश में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। पुलिस ने इसके लिए विशेष इंतज़ाम किये हुए हैं। नागरिकों को भी ऐसे मैसेज की सच्चाई जाने बगैर इनका समर्थन नहीं करना चाहिए।