April 20, 2018, 5:03 am
ऐसी फिल्मों को सेंसर बोर्ड कैसे पास कर देता है

ऐसी फिल्मों को सेंसर बोर्ड कैसे पास कर देता है

उस पहली फिल्म को याद करना चाहिए, जिसमे पहली बार दिखाया गया था कि भगवान स्वर्ग से पृथ्वी पर आते हैं और बुरे लोगों को सबक सिखाते हैं। स्वर्ग-नरक से लेकर ओह माय गॉड फिल्म तक भगवानों को धरती पर भेजा जाता रहा है। लेकिन बदलते समय के साथ ऐसी फिल्मों में भौंडापन आता चला गया। एक नई फिल्म आ रही है '3-देव'। इसके नए पोस्टर आए हैं, जिन पर लिखा हुआ है 'अंडरकवर भगवान'। लीजिये साहब लवरात्रि और महाभारत से पहले ही एक ऐसी फिल्म आ रही है, जिसे देखने के बाद हिन्दू समुदाय में एक बार फिर निश्चित रूप से तनाव फैलने जा रहा है। इस फिल्म के निर्माता-निर्देशक ने हाल ही में मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फिल्म के बारे में सवालों के जवाब दिए। फिल्म में केके मेनन भी काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म में भगवान का मतलब एक शक्ति से है। फिल्म समीक्षक कोमल नाहटा इस फिल्म के बारे में ट्वीट करते हैं और उसमे लिखते हैं 'आख़िरकार भगवान आ गए'। ये सब क्या चल रहा है। सेंसर बोर्ड के होनहार अध्यक्ष क्या कर रहे हैं। क्या वे चरस पीकर फिल्म पास करने लगे हैं। फिल्म की आपत्तिजनक विषयवस्तु पर सूचना व प्रसारण मंत्रालय की नींद क्यों नहीं खुलती। फिल्म में जो तीन हीरो हैं, उन्हें ब्रम्हा, विष्णु और महेश की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्माता-निर्देशक ने वह हॉट सीन क्यों नहीं दिखाए, जिनमे इन भगवानों को दिखाया गया है। बात फिर वहीँ उठती है कि निर्देशक की कल्पना में ब्रम्हा ही क्यों हैं। उसकी कल्पना में मोहम्मद या ईसा क्यों नहीं है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक नायकों पर फिल्मे बनाई जाए, उससे किसी को एतराज नहीं है लेकिन इस तरह की कल्पनाएं हिन्दुओं के आराध्य का अपमान ही करती है। इस मामले में सरकार की निष्क्रियता निराश करती है। सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष को क्या ये पता नहीं है कि ये हिन्दू बाहुल्य देश है। आप फिल्म बनाए और हमारे आराध्य को आदर्श की तरह प्रस्तुत करे, उसमे कोई परेशानी नहीं है लेकिन इस तरह की हरकते अंततः हिन्दू समाज को भड़काने का काम करेगी।