शास्त्रों के अनुसार क्यों नहीं खाना चाहिए किसी का जूठा भोजन ? जानकर दंग रह जाओगे !

शास्त्रों के अनुसार खाना खाते वक़्त रखे इन बातों का ध्यान…

खाना खाते समय यदि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो स्वास्थ्य लाभ के साथ ही देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त की जा सकती है. हिन्दू धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ ना मानकर पूजनीय भी माना गया है. अन्न अर्थात अनाज को देवता का दर्जा दिया जाता है. शास्त्रों के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं. तो आइये जानते है क्यों नही खाना चाहिए किसी का झूठा भोजन ?

परिवार में जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो घर के बड़े-बुजुर्ग अपने अनुभवों के आधार पर उसे कुछ उपयोगी परंपराओं से अवगत करवाते हैं, जो संस्कारों के रूप में जीवन भर उसके साथ रहते हैं. आजकल एकल परिवारों का चलन जोरो पर है तो बच्चों को जो परवरिश मिलनी चाहिए वो मिल नहीं पाती, जिससे की जीवन में बहुत सारी परेशानियां व्यक्ति के जीवन में घर कर जाती हैं.

भोजन करते समय क्या ना करें :-

  • भोजन करते समय टीवी देखना, संगीत सुनना अथवा बातचीत करना निषेध बताया गया है. शास्त्रों में किसी का जूठा खाने पर भी बड़ा प्रतिबंध है, लेकिन हम लोग सोचते हैं कि झूठा खाने से प्यार बढ़ता है.
  • लोगों के बीच ऐसी मान्यता है कि किसी का जूठा खाने से प्यार बढ़ता है, लेकिन शाष्त्रों के अनुसार किसी का झूठा भोजन कर आप किसी का दुर्भाग्य अपने नाम कर लेते हैं. दरअसल हिन्दू धर्म में भोजन को केवल खाद्य पदार्थ ना मानकर पूजनीय भी माना गया है.

  • ज्योतिषशास्त्र के अनुसार व्यक्ति की कुण्डली का दूसरा भाव जुबान, वाणी सुख, कलत्र, धन की बचत और जीवन में मिलने वाले सुखों को संबोधित करता है. अगर दूसरे भाव में व्यक्ति की वाणी और भाषा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो भाषा में कर्कशता का भाव आता है और भी बहुत सारे दुष्प्रभाव पड़ते हैं.
  • यदि हम किसी का का जूठा खाते हैं तो हमारे जीवन पर कई तरह के बुरे प्रभाव पड़ते हैं, जैसे कि सुखों में कमी आती है, घर-परिवार में कलह बढ़ती है और भोग-विलासिता में कमी आती है.

  • इतना ही नहीं, हम जिसका जूठा खाते हैं उसके अशुद्ध विचार हमारे मन में घर कर जाते हैं. सबसे बुरा असर हमारे धन पर होता है, किसी का जूठा खाने से धन संचय नहीं हो पाता.

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