खुश रहने का फार्मूला किसी संत ने नहीं बल्‍कि इस सबसे बड़े वैज्ञानिक ने दिया था,अब करोंडो में बिक रहा है !

नोबेल पुरस्कार विजेता आइंस्टीन ने बनाई ख़ुशी की पुड़िया !

आइंस्टीन का लिखा ‘ख़ुशी का नुस्ख़ा’ 10 करोड़ में बिका..

खुशियां किसे नहीं चाहिए होतीं, हर कोई इसी की तलाश में लगातार मेहनत करता चला जाता है. लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाता क्योंकि जीवन में परेशानियां और दिक्कतें इतनी है कि इंसान चाहकर भी खुश नहीं रह सकता.भागदौड़ के बीच लोगों को सब कुछ मिल जाता है, बस नहीं मिलती है तो खुशी. हम अक्सर सोचते हैं खुशी हासिल करने के लिए हमें क्या करना चाहिए?

खुश रहने का फार्मूला !

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया में एक इंसान ने खुश रहने का फार्मूला सालों पहले ही दे दिया था. पर वह कोई संत या महात्मा नहीं था बल्कि था दुनिया का सबसे महान वैज्ञानिक. जी हां, वो नाम है अल्बर्ट आइंस्टाइन. आज इतने सालों बाद भी उनका दिया यह फार्मूला करोड़ों रुपए में बिक रहा है. आखिर क्या है इसमें खास ? E= mc2, यह फार्मूला तो हम सभी ने कभी ना कभी पढ़ा होगा.

दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 100 साल से भी ज्यादा पहले यानी 1905 में यह थ्योरी ऑफ स्पेशल रिलेटिविटी का फार्मूला दिया था. सालों बीत गए लेकिन कोई भी वैज्ञानिक आइंस्टाइन के इस फार्मूले को काट नहीं पाया. आइंस्टाइन के फॉर्मूले कितने कारगर साबित होते हैं यह तो कोई वैज्ञानिक ही ठीक से समझ सकता है.

इजराइल के येरुशलम में नीलाम किया गया ! वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें !

लेकिन एक मजेदार बात यह है कि आइंस्टाइन ने साल 1922 में एक और फार्मूला लिखा था जिसे कहते हैं थ्योरी ऑफ हैप्पीनेस यानी खुशी का फार्मूला. करीब सौ साल बाद उनके हाथों से लिखा यह फार्मूला वाला कागज करीब 10 करोड रुपए में बिका है. जर्मन भाषा में लिखा हुआ यह छोटा सा लेटर आइंस्टाइन ने एक कोरियर वाले को दिया था. आइंस्टाइन के हाथों लिखा यह छोटा सा नोट हाल ही में इजराइल के येरुशलम में नीलाम किया गया.

जिसे 1.56 मिलियन डॉलर में खरीदा गया यानी कि भारतीय रुपयों में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा में आइंस्टीन का यह खुशियों का फार्मूला बिका है. सालों पहले आइंस्टीन के हाथों लिखी यह बात आज सच साबित हो गई क्योंकि आइंस्टीन के हाथों लिखा थ्योरी ऑफ़ हैप्पीनेस वाला कागज जिस व्यक्ति ने नीलाम किया है वह उसी पार्सल वाले का भतीजा है.

आइंस्टीन के हाथों लिखा यह खुशनुमा फार्मूला जिस कीमत पर बिका है वह बहुत ज्यादा है. बताया जा रहा है कि इजराइल में आज तक किसी कागज की इतनी ज्यादा बोली नहीं लगाई गई है.