शूर्पणखा ने कहा था रावण से, इन 6 को कभी कमजोर ना समझें !!

आज हम आपको रावण-शूर्पणखा से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग बतायेंगे, जो शायद ही आप लोग जानते होंगे.

महर्षि वाल्मिकी द्वारा रचित महान ग्रंथ रामायण में इस प्रसंग का उल्लेख मिलता है. इसके अनुसार जब शूर्पनखा लक्ष्मण द्वारा अपनी नाक कटवाने के बाद अपने भाई रावन के पास पहुँचती है जो ऐसी बात कहती है जिसको जानना और समझना बहुत जरुरी है.

श्लोक:- रिपु रुज पावक पाप प्रभु अहि गनिअ न छोट करि। अस कहि बिबिध बिलाप करि लागी रोदन करन।।

इसका अर्थ है ! हमे अपने घमंड में कभी भी शत्रु, रोग, अग्नि, पाप, स्वामी और सर्प को दुर्बल नहीं समझना चाहिए. ये कभी भी हमें नुकसान पहुंचा सकते है. ये कैसे होगा, हम आपको नीचें बताते है.

  • शूर्पनखा का कहना था कि हमे अपने शत्रु को कभी भी छोटा व कमजोर नहीं समझना चाहिए. शूर्पनखा ने वही गलती की और अपनी नाक गवा बैठी थी. हमें हमेशा याद रखना चाहिए की  एक छोटी सी चींटी भी हाथी की जान का खतरा बन सकती है.
  • रोगों को कभी भी नजरंदाज नहीं करना चाहिए फिर चाहे वो कोई छोटा सा रोग ही क्यों ना हों.
  • आग की छोटी सी चिंगारी भी बड़ी तबाही मचा सकती है, क्योंकि आग भी तो चिंगारी से ही बनती है.
  • हमारे पापों का परिणाम हमें यही भुगत कर जाना होता है. कुदरत कब हमे हमारे पापों का फल दे दे कोई नहीं जानता.
  • अपने गुरु, स्वामी या आचार्य को कभी भी अपने से कमजोर व छोटा नहीं समझना चाहिए.
  • सांप एक जहरीला जीव है. यह कभी भी डंक मार सकता है और मिनटों में हमारा जीवन ख़तम कर सकता है.

By: Staff Writer on Saturday, July 15th, 2017