बहनों ने लिया ड्रैगन से बदला, रक्षाबंधन पर नहीं ली चीनी राखी, चीन को 1600 करोड़ का नुकसान !

डोकलाम विवाद के चलते कम रही चीनी राखियों की मांग…

चीनी राष्ट्रपति की जिद और बेवकूफी का खामियाजा चीन की अर्थव्यवस्था (Economy) को उठाना पड़ रहा है. इस बार देश में चीनी राखियों को कारोबार 95 प्रतिशत तक कम हो गया जिससे चीन को करीब 1600 करोड़ का नुकसान हो गया है. इस साल खुद रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) के सामानों की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने बड़ी संख्या में चीन के उत्पादों का बहिष्कार किया है. चीन हमारे पैसों का प्रयोग हमें ही धमकाने के लिए कर रहा है. हम उन्हें पैसे कमाने का मौका क्यों दें?’

Image result for डोकलाम विवाद के चलते कम रही चीनी राखियों की मांग

IMAGE CREDIT

डोकलाम (Dokalm) विवाद के चलते चीन के व्यापार पर काफी असर पड़ रहा है. जानकारी के मुताबिक इस बार रक्षाबंधन में भी चीनी राखियों की मांग काफी कम रही है. एक अनुमान के अनुसार बाजार में चीनी राखियों की बिक्री 85 फीसदी तक कम हुई है. देश की युवा पीढ़ी दोबारा कच्चे धागों की ओर लौटती दिखी है. छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि इस बार बाजार में चीनी राखियां तो बहुत कम थीं पर भारत में बनी हुई राखियों पर चीन में बने सामान लगाए गए थे.

बता दें कि ये कोलकाता में बनी हुई बताई जा रही हैं. उनका कहना है कि चीनी सेना के डोकलाम में दादागिरी दिखाने का नुक्सान उसे भारतीय बाजारों में उठाना पड़ रहा है. दीपावली और होली के त्यौहारों पर हुए चीनी सामानों के बहिष्कार से अभी चीनी बाजार उबर भी नहीं पाया था कि डोकलाम में उसकी सेनाओं की बेवकूफी की वजह से उसको भारी नुक्सान उठाना पड़ा. देशवासी एकजुटता दिखाते हुए चीनी सामानों का बहिष्कार कर रहे हैं.

Image result for डोकलाम विवाद के चलते कम रही चीनी राखियों की मांग

IMAGE CREDIT

उल्लेखनीय है कि राखी का सामान बेचने वाले व्यापारियों ने भी कहा था कि मार्केट में चीन के उत्पादों की मांग में भारी कमी देखने को मिल थी.व्यापारियों का मानना था कि शायद जनभावना के कारण या फिर देशभक्ति की वजह से चीनी राखियां इस साल बाजार से गायब थीं. भारत में बनी राखियों से बाजार सजा हुआ था और उनकी  ही अच्छी बिक्री भी हुई.

By: Jindal on Wednesday, August 9th, 2017