राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद: शिया वक्फ बोर्ड ने SC से कहा- मंदिर गिराकर बनाई गई थी मस्जिद

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड फिर आमने-सामने..

भारत एक हिन्दू देश है. बात जब हिन्दू धर्म के सबसे पूजनीय भगवान की आती है तो श्री राम का नाम सबसे अवल है लेकिन श्री राम की जन्म भूमि अयोध्या में मंदिर बनाने को लेकर आजतक सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है. इससे सिर्फ एक बात ही साबित होती है कि भारत चाहे कितना भी आधुनिक बन जाए लेकिन यहाँ सिर्फ मुसलमानों को ही आज़ादी है कुछ भी करने की और साथ ही यहाँ हिन्दुओ की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जाता है.

shia board moves sc for ownership of babri masjid

मौजूदा खबर अनुसार बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई हारने के 71 साल बाद यूपी का शिया वक्फ बोर्ड बुधवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. बता दें कि याचिका दायर करने से एक दिन पहले ही वक्फ बोर्ड ने माना था कि वह विवादित मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने के लिए तैयार है ताकि इस विवाद को खत्म किया जा सके. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद को उस जगह बने राम मंदिर को नष्ट करके बनाया गया था.

शिया वक्फ बोर्ड ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के खिलाफ कोर्ट में  दाखिल की अपनी याचिका, क्या लिखा है इस याचिका में !!

  • सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद को उस जगह बने मंदिर को नष्ट करके बनाया गया था
  • ट्रायल कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को सुन्नी वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित करके गंभीर गलती की है, क्योंकि इस मस्जिद को शिया मुस्लिम ने बनवाया था.
  • बोर्ड ने दावा किया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर के एक मंत्री अब्दुल मीर बाकी ने अपने पैसों से करवाया था. बाकी एक शिया मुस्लिम थे, जबकि बाबर एक सुन्नी मुसलमान.
  • बाबर अयोध्या के नजदीक 5 या 6 दिन ही ठहरा, क्योंकि मस्जिद बनवाने में ज्यादा वक्त (मंदिर को तोड़ना और मस्जिद बनाना) लगना था.
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  • बाबर ने शायद बाकी को मस्जिद बनवाने कहा हो, लेकिन बाकी ही वह शख्स थे, जिन्होंने जगह की पहचान की और मंदिर गिरवाया ताकि मस्जिद का निर्माण करवाया जा सके.
  • शिया बोर्ड का आरोप है कि मस्जिद के बनने के बाद से उसकी देखरेख शिया समुदाय के लोग ही कर रहे थे, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने गलत ढंग से 1944 में इसे सुन्नी वक्फ बता दिया.
  • ट्रायल कोर्ट को चुनौती देते हुए बोर्ड ने कहा कि मस्जिद में ऐसे शिलालेख मौजूद हैं, जिनपर विस्तार से यह बताया गया है कि बाकी ही इस मस्जिद के निर्माता थे और कोर्ट ने उसके दावे को खारिज करके गंभीर गलती की है.

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बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में शिया वक्फ बोर्ड की ओर से याचिका दाखिल किए जाने के बाद उसका सुन्नी वक्फ बोर्ड से पुराना टकराव एक बार फिर जीवित हो चुका है. अब शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड फिर एक दूसरे के आमने-सामने होंगे. शिया बोर्ड विपक्षी खेमे पर यह आरोप लगा चुका है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के विरोध की वजह से राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का आम राय से हल नहीं निकल सका है.

By: jagjit singh on Saturday, August 12th, 2017