संपन्न लोग गरीब लोगों के घर जाकर तिल-गुड़ देकर एकात्म का संदेश दें: भागवत

विदिशा। कोरेगांव भीमा में हुई हिंसक घटनाओं से संघ बहुत चिंतित दिखाई दे रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यदि इस गैर समरसता को बढ़ावा मिलता है तो भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। भागवत ने ये बात विदिशा में संघ की तीन दिवसीय बैठक के दौरान कही। उन्होंने कहा दलितों और आदिवासियों को साथ जोड़ना पड़ेगा।

कोरेगांव भीमा की घटना के बाद संघ अपने सामाजिक समरसता के एजेंडे को गंभीरता से ले रहा है। बैठक के पहले दिन ही भागवत ने स्पष्ट कर दिया कि दलितों और आदिवासियों के लिए अधिक काम करने की आवश्यकता है। भागवत ने कहा कि मकर संक्रांति के दिन संपन्न लोग समाज के गरीब तबके के लोगों के घर जाकर तिल-गुड़ दें और एकात्म का संदेश दें। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को दलित और आदिवासियों के लिए ज्यादा काम करने पर जोर दिया है। उनकी इस नसीहत को इस साल आठ प्रदेशों में होने वाले विधानसभा के चुनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
अनुषांगिक संगठनों में बदलाव संभव
भागवत ने दलित और आदिवासी क्षेत्र में काम करने वाले अपने अनुषांगिक संगठनों से न केवल रिपोर्ट ली, बल्कि चेताया कि वनवासी कल्याण आश्रम और हर सोमवार सेवा बस्तियों में जाने वाले स्वयंसेवक गंभीरता से काम करें। अपनी भागीदारी बढ़ाएं। लोगों को समझाएं। संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि कई जगह समन्वय की कमी दिखती है, जो सही नहीं है। इस साफगोई के बाद माना जा रहा है कि विदिशा की समन्वय बैठक के बाद संघ के 32 से अधिक संगठनों में बदलाव किया जा सकता है।

भाजपा के पदाधिकारी भी मौजूद
संघ की तीन दिवसीय इस बैठक में मध्य प्रांत के अंतर्गत आने वाले मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रचारक व अन्य अनुशांगिक संगठनों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इसमें भाजपा के पदाधिकारी भी मौजूद हैं। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख अभी हाल ही में उज्जैन में भी लगभग पांच दिन तक रुके थे। इस दौरान उन्होंने अखिल भारतीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें भी की थी।