मचेगा हंगामा जब मोदी पहुँचेंगे इसराइल अपनी इजराइल यात्रा में इस बात का जिक्र करना नहीं भूलेंगे, क्योंकि ….

दोस्तों ये बात तो आप सभी जानते ही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने इजरायल की यात्रा पर जाने वाले है और वहां जाकर वे और कुछ कहे न कहे लेकिन एक बात है जिसका जिक्र करना वे बिलकुल नही भूलेंगे और वह है हाफिया का युद्ध, बता दें हाफिया इजरायल की राजधानी से 90 किलोमीटर दूर स्थित एक समुद्री बंदरगाह वाला शहर है और कहा जा रहा है कि मोदी जी वहां हाफिया के शहीद स्मारक पर भी जाएंगे .

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान कुछ भारतीय सैनिक अंग्रेजो की तरफ से लड़ने के लिए हाफिया पहुंचे, ये सैनिक ब्रिटिश भारतीय सेना के सिपाही न होकर 3 रियासतो के सिपाही थे . कहा जाता है कि जब भारतीय सेनाओ का खलीफा की सेना से मुकाबला होने जा रहा था तो उस समय अंग्रेजो के सामने समस्या पैदा हो गयी थी .

बता दें जोधपुर व् मैसूर लांजर की सेना में हिन्दू सिपाही थे जबकि हैदराबाद की सेना के सिपाही मुसलमान थे इसलिए अंग्रेजो को लगा कि ये लोग इस्लामी खलीफा की सेना से युद्ध करने से मुकर न जाए इसलिए उन्होंने उन सैनिको को युद्ध पर न भेजते हुए दुसरे कामो में लगा दिया . इसके बाद मैसूर और जोधपुर की सेना आगे बढ़ी उनके पास केवल तलवार और भाले थे जबकि सामने वालो के पास तोप और मशीन थे .

जब ब्रिटिश अफसरों ने उन्हें वापिस लौटने को कहा तो उन्होंने इंकार करते हुए कहा ” हमने युद्ध में पीठ दिखाना नही सीखा है, यदि हम बिना लड़े वापिस गए तो देश के लोगो को क्या मुंह दिखाएंगे .इसके बाद परिणाम ये हुआ कि आमने सामने की लड़ाई में 900 भारतीय सैनिक मारे गए और उन्होंने दुश्मन के 700 सैनिको को बंदी बना लिया .

हाफिया का युद्ध उनकी वीरता का परिणाम था और 12 सितंबर 1918 को हाफिया पर जीत हासिल की, शहीद सैनिको का अंतिम संस्कार भी वहीँ किया गया और आज़ादी के बाद से ही हमारे देश के सेक्युलर नेता इजरायल का साथ देने से डरते है .

दस्तावेजों में भी हाफिया या उसमे शहीद हुए भारतीय सैनिको का जिक्र नही किया गया है लेकिन इसके बावजूद भी इजरायली सेना 23 सितंबर को हर साल हाफिया दिवस मनाती है ।

By: Thakur Mintu on Wednesday, May 17th, 2017