फ़िल्म PK के बाद अब दंगल में भी दिखाया आमिर ने अपना जिहादी रूप !

जैसा की आपने आमिर खान की PK फिल्म में देखा होगा उन्होंने किस तरीके से भगवान का मजाक उड़ाया था इसके बाद भी वे अपनी हरकतों से बाज नही आए है उन्होंने दूसरी फिल्म में भी इसे आख़िरकार दोहरा ही दिया है .

यदि एक बार उनकी गलती समझ के मान भी जाए तो अब दूसरी बार जो दंगल फिल्म बनाने के जिहादी लक्ष्ण दिखाए है उन्हें अब आप क्या कहोगे . ये हमारा उनकी फिल्म को लेकर कोई आरोप नही है लेकिन इसके लिए हम नीचे कुछ प्रमाण देने जा रहे है जिन्हें पढ़कर आप खुद समझ जाओगे .

1 हनुमान की तस्वीरे गायब !

आमिर खान ने दंगल फिल्म के किसी भी सीन में हनुमान की तस्वीर नही रखने का फैसला लिया था हालंकि उन्होंने एक सीन में हनुमान को पीछे दिखाया था लेकिन उसमे भी तस्वीर बहुत ही धुंधली नज़र आ रही थी ये उन्होंने इसलिए किया क्यूंकि महावीर फोगट हनुमान के बहुत बड़े भक्त है असली महावीर फोगट के घर में जगह-जगह हनुमान जी की तस्वीरे देखने को मिलेगी लेकिन आमिर ने ऐसा फिल्म में कुछ नही दिखाया है .

मांसाहार का सेवन झूठ !

इस फिल्म में जो सबसे बड़ा झूठ दिखाया गया है वो है आमिर खान का अपने बच्चो को मांस खिलाना जबकि असली महवीर फोगट और उनका पूरा परिवार शाकाहारी है तो यहाँ पे अब सवाल ये उठता है जब फोगट परिवार पे फिल्म बनानी ही थी तो आमिर मांस का सीन डालकर क्या दिखाना चाहते थे

शराब का सेवन करना झूठ !

दंगल में महावीर फोगट का किरदार कर रहे आमिर खान ने शराब का सेवन किया है जबकि असली फोगट नशे से कोसो दूर है और तो और पहलवानी के लिए हरियाणा में परम्परा के मुताबिक शराब और दूसरी तरह की बुराइयों को हाथ तक नही लगाते है .

मुसलमान हमेशा नेक इंसान !

आपने हिंदी फिल्मो में आमतौर पर देखा होगा कि जो भी मुस्लिम फिल्म में टोपी पहनता है वह नेक दिल का इंसान होता है और पंडित को हमेशा ठग दिखाया जाता है आमिर खान ने भी ठीक अपनी दंगल में कुछ ऐसा ही दिखाया है फोगट एक कसाई से चिकन खरीदता है और बाद में वो ही कसाई गीता फोगट के लिए भगवान का प्रसाद लेकर आता है ये किरदार आमिर खान ने मुसलमानों को अच्छा दिखाने के लिए डाला है .

गुरु शिष्य परम्परा का मजाक !

जैसा की गुरु शिष्य हर जगह बहुत मायने रखती है फिर चाहे वह पढाई के मामले में हो या पहलवानी के . ये परम्परा हिन्दू धर्म का एक अहम हिस्सा है इस फिल्म में गीता के कोच पीएल सोंधी थे और दंगल में ये दिखाया गया है कि गीता के कोच उसके खिलाफ साजिशे रच रहे थे जबकि असली गीता के साथ ऐसा कुछ नही हुआ है .