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बनेगा एक और बांग्लादेश ? मोदी के इस तीर को क्या पाकिस्तान झेल पायेगा?

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की रणनीति तैयार करनें में सबसे आगे रहे हैं. एक तीर से कई निशाने लगाने का काम वह बखूबी जानते हैं. उनके तुरीन में से निकला बांण कब किसे सबक सिखा जाये यह कोई नहीं जानता. वह तो बस धीरे से अपना काम कर जाते हैं. अपने दुश्मनों को वह कभी नहीं छोड़ते. वो चाहें अन्दर से हों या फिर सरहद पार के. इस बार जो तो वो करने जा रहे हैं जिसे एक बार फिर दुनियां देखेगी.

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1981 बैच के आईपीसी ऑफिसर, ए.के. धसमाना का अचानक से रॉ का चीफ बनना तय है. 31 जनवरी 2017, को इस बात की घोषणा हो सकती है. उस दिन रॉ चीफ की पोस्ट खाली हो जाएगी. धसमाना के रॉ चीफ बनने का सीधा असर पाकिस्तान और उसकी राजनीति पर पड़ने वाला है. उसका कारण साफ़ है. बलूचिस्तान के मामलों में धासमाना का गहन ज्ञान और समझ का होना.

भई बलूचिस्तान के हालात कौन नहीं जानता. पहले तो वहां के लोगों का पाकिस्तानी सरकार पर से विश्वास उठ चुका है. दूसरा, वहां के लोग भी मोदी भक्त हो चुके हैं. उन्हें अपनी सरकार से ज्यादा मोदी जी पर यकीन है. इस बात का प्रदर्शन वह लंदन में पहले ही कर चुके हैं. मोदी जी के नारे लगाते हुए उनसे मदद की गुहार करना छोटी बात तो नहीं. पाकिस्तानियों के लिए यह बात हजम करना टेड़ी खीर से कम नहीं था. वो भला कैसे यह मान लें कि रेत की तरह बलूचिस्तान उनके हाथ से सरक रहा है.

मोदी जी के सामने धसमाना की सिफारिश करने वाला भी कोई आम आदमी नहीं हो सकता. नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइजर, अजीत डोवल उनके ख़ास माने जाते हैं. उनके साथ काम कर चुके धसमाना फ्रैन्क्फुर्ट और लंदन में चीफ रहे थे. ग्वादर पोर्ट पर किया गया काम धसमाना के कार्यों में शामिल है. जिसके कारण इस बंदरगाह के बनने का काम 6 साल पीछे चला गया था. यह बंदरगाह पकिस्तान और चीन के लिए बहुत जरूरी था.

बहरहाल रॉ चीफ का कार्यकाल 2 साल का होता है. बाद में जिसे प्रधानमंत्री द्वारा बढ़ाया भी जा सकता है. क्या इतिहास दोबारा दोहराया जायेगा? क्या पाकिस्तान एक बार फिर अपनी करनी पर पछतायेगा. उसने जो कश्मीर में करना चाहा. वो तो कभी हुआ नहीं. जबकि 1971 में उससे बंगाल अलग हो गया. उस समय पंडित रामेश्वर दत्त राव रॉ चीफ थे. तीन साल के प्रयासों के बाद उस रॉ चीफ ने जो कर दिखाया क्या वही बलूचिस्तान में हो सकेगा. यह तो समय बताएगा. मगर दूरंदेशी मोदी जी का तीर चल चुका है. अब पकिस्तान उससे कैसे बचेगा यह देखने के लिए सब बेकरार हैं.

 

By: Aashu dhawan on Wednesday, December 7th, 2016

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