मुसलमानों ने जी न्यूज के चर्चित शो “फतह का फतवा” के खिलाफ हाई कोर्ट में दाखिल की याचिका, चैनल का लाईसेंस रद्द करने की मांग …

तारिक फ़तेह को बताया मुस्लिमों का दुश्मन !!

आज जी न्यूज चैनल को भला कौन नहीं जानता ? क्यूंकि हिन्दू और हिन्दू हितों के ऊपर खुलकर बहस करने और करोड़ों हिन्दुओं की आवाज को प्रमुखता से उठाने वाला शायद यही एक इकलौता चैनल हिन्दुस्तान की जनता के पास है . बाकी सब तो गैर हिन्दुओं के दर्द के लिए हर पल चिंतिंत रहते हैं. खैर असली बात पर आते हैं और आपको बताते हैं की कैसे और क्यूँ मुसलमान जी न्यूज के इस सर्वाधिक देखे जाने वाले शो को बंद करवाना चाहते हैं ?

आपको बता दें की कुछ दिन पहले ही जी मीडिया ने अपने चैनल जी न्यूज पर मुस्लिम समाज के अच्छे बुरे मुद्दों पर एक कार्यक्रम शुरू किया था . जिसकी होस्टिंग पाकिस्तान मूल के चर्चित लेखक और पत्रकार तारिक फ़तेह कर रहे हैं . और इस कार्यक्रम का नाम भी उन्ही के नाम से “फतह का फतवा” रखा है . तारिक फ़तेह साहब वैसे तो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. मगर फिर भी आपको बता दें की वो अपनी साकारात्मक सोच और मुस्लिम समाज में तथाकथित मुस्लिम बिद्वानों की गलत मनगढंत बातों व फतवों के खिलाफ बेबाकी से बोलते हैं .

बस यही वो सब बातें हैं जिन बातों को पाकिस्तान के मुसलमान मौलवी, मौलाना सहन नहीं कर पाए और पाकिस्तानी सरका पर दवाव बनाकर उन्हें पाकिस्तान से बाहर निकलवा दिया . और अब वो कनाडा में बस गए हैं . वर्तमान में भारत में हैं और अपने जीवन भर के कुरआन और मुस्लिम धर्म के ऊपर अधयन व शौध के अनुभवों के आधार पर भारतीय मुस्लिम समाज में फैली बुराईयों को जी न्यूज के मंच के माध्यम से उजागर करने का साहस भरा काम कर रहे हैं . जो की पाकिस्तान की ही तरह भारत में रहने वाले मौलवियों , मुसलमानों , इमामों, उलेमाओं को बहुत नागवार गुजर रहा है . जिसके चलते उन सबने मिलकर एक मुस्लिम वकील हिफजुर रहमान खान के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है . जिसमे दलील देते हुए कहा गया है कि फतह का फतवा देश की अखंडता और गंगा जमुना तहजीब के खिलाफ है .

इतना ही नहीं मुस्लिम वकील हिफजुर रहमान ने यह भी कहा है कि जी न्यूज अपने इस प्रोग्राम के माध्यम से इस्लाम धर्म और उसकी पाक किताब और हदीस पर कीचड़ उछालने का काम कर रहा है . तारिक फतह के माध्यम से इस चर्चित कार्यक्रम में मदरसों, इस्लामी किताबों, ओलिया अल्लाह को निशाना बनाकर उनका अपमान किया जा रहा है . इसलिए आदालत को इस कार्यक्रम को बिना बिलम्ब बंद करके जी न्यूज के लाईसेंस की बर्खास्ती हेतु भारत सरकार को आदेश जारी करने की मांग की है .

अब गौर करने वाली बात यह है आखिर क्यूँ सारे मौलाना मुफ़्ती , इमाम और मौलवी इस कार्यक्रम को बंद करवाना चाहते हैं ? क्या उन्हें अपनी कौम और सदियों से बराबरी के हक़ से महरूम रखी महिला आबादी की स्वतंत्रता नागवार गुजर रही है? या फिर वो इस बात से डरे हुए हैं की कहीं हिन्दुस्तान की मुस्लिम महिलायें इस शो के माध्यम से जागरूक होकर समानता के अधिकार की लड़ाई हेतु मुस्लिम पुरुष सोच के खिलाफ खडी न हो जाएँ, जैसा की धीरे- धीरे परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं . कहीं न कहीं सबसे बड़ा डर मुल्ले मौलवियों को शायद यह भी है की अगर तीन तालाक और हलाला जैसे क़ानून जो की मौलानाओं ,मौलवियों ,और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड द्वारा जबरदस्ती महिला उत्पीडन हेतु मुस्लिम महिला समाज पर थोपे गए हैं, उन पर से उनका प्रभाव ख़त्म हो जाएगा . और मुस्लिम औरतें भी हिन्दू समाज की तरह मुस्लिम पुरुष समाज के बराबर आ जाएँगी और फिर कोई मुल्ला –मौलवी या मुस्लिम पुरुष उन्हें अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए मनमर्जी से इस्तेमाल नहीं कर पायेगा और जरुरत पूरी होने के बाद तालाक देकर उन्हें छोड़ नहीं पायेगा .

वैसे कितनी अजीब बिडम्बना है की स्वयं को अल्पसंख्यक कहने वाले मुस्लिम लोग आरक्षण जैसे क़ानून हेतु भारतीय संविधान को मानते हैं और अपनी ऐयाशी और मस्ती हेतु आल इंडिया पर्सनल ला का हवाला देने लगते हैं . और जब देश व राष्ट्रीयता की बात आती है देश की अस्मिता और इज्जत से जुडी भारत माता की जयघोष और राष्ट्रगान जैसे मुद्दों को दरकिनार करते हुए इस्लाम का हवाला देते हैं और कहते की इस्लाम ऐसा करने की इज्जाजत नहीं देता है . पर खैर जो भी हो देश में अब एक व्यापक स्तर पर इन मुद्दों को लेकर बहस छिड चुकी है .

आज नहीं तो कल इस्लाम का असली चेहरा दुनिया के सामने जरुर आयेगा . सेक्युलर मीडिया इन बातों पर कभी मुंह नहीं खोलेगा. इसलिए हम सभी भारतवासियों का फर्ज बनता है की देश में हिन्दू मुस्लिम एकता हेतु मुस्लिम समाज में व्याप्त बुराईयों को विश्वपटल पर सामने लाने हेतु जी न्यूज को सपोर्ट करें . और देश भक्त पत्रकारों का हौंसला बढाने का काम करें .