क्या हुआ एक सेक्युलर लड़की का अंजाम जानिएगा तो रूह काँप उठेगी !!

सूर्या नाम की एक लड़की ने की मुस्लिम प्रेमी अरशद से शादी ,लोगों ने उसको बहुत समझाया पर मानी नही और हो गई मौत का शिकार !

इसमें हम आपको बहुत ही स्पष्ट तरीके से बताते है कि -अरशद जो की एक ऑटो चालक है और सूर्या एक छात्रा है जो कि हर रोज पढ़ने जाती है और कभी -कभी अरशद के ऑटो में जाती है । फिर क्या था  , दोनों के बीच नजदीकिया आने लगी उनका प्यार परवान चढ़ने लगा । कुछ हिन्दू  युवकों ने और उसके परिवार के लोगो ने लड़की  को बहुत समझाया पर वो मानी नहीं और उसने शादी कर ली जिससे उसने  दो बच्चों को जन्म दिया ।

सूर्या जिसने किसी की भी न मानी थी धीरे धीरे उसे अपने पति अरशद और उसके परिवार यानी कि अपने ससुराल वालों का असली रूप दिखने लगा, वो लोग उसको जबरन गोमांस खिलाने लगे और इस्लाम धर्म अपनाने के लिय मजबूर करने लगे ,मना करने पर उसको मारने पिटने लगे । तब जाके उसको हिन्दुओ की और अपने परिवार की दी गयी नसीहत याद  आने लगी पर अब वो फँस चुकी थी और कुछ नही कर सकती थी ।

इसी तरह दिन बीतते गए और सूर्या अपनी जिंदगी से परेशान होने लगी और सोचने लगी की काश उस वक्त थोडा सा विचार किया होता तो आज यह दिन देखना न पड़ता। फिर एक दिन उसने वो निर्णय लिया जिसके बाद कभी कोई वापिस नहीं आता है, दरसल उसकी परेशानी इतनी बढ़ गयी थी कि उसने एसिड पीकर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली । एक हिंदू लड़की को मुस्लिम लड़के से शादी करके क्या झेलना पड़ता है सूर्या का जीवन उसकी एक झलक दिखाता है  ।

हम किसी के प्यार के ख़िलाफ़ नहीं हैं पर हमें बेहद दुःख के साथ यह बोलना पड़ रहा है कि ऐसी हजारों लाखो हिंदू लड़कियाँ होंगी जिनका जीवन सूर्या की तरह नरक बन गया होगा।  जिनको ऐसे हालातों से रोज़ गुजरना पड़ता है , अरशद जैसे इन्सान को तो कोई और सूर्या मिल जायगी और उन बच्चों को भी सौतेली ही सही पर दूसरी माँ मिल जायगी लेकिन जिनकी बेटी इस दुनिया से चली गयी , क्या वो कभी वापिस आएगी क्या सूर्या की ज़िंदगी जो एक ख़राब निर्णय की वजह से ख़त्म हो गयी वापिस आएगी  ?

इस सारी घटना के बारे में आपने पढ़ा, अंत में हम सभी को लेकिन ख़ासकर हिंदू लड़कियों को यह कहना चाहते कि वे लव जिहाद में ना फँसें  , मुस्लिमों का कल्चर हिन्दुओं से पूरा अलग है  , अधिकतर हिंदू परिवार शाकाहारी होते हैं और हिन्दुओं में तो चींटी को भी मारना पाप माना जाता है  , लेकिन मुस्लिमों में जानवर काटना, उसका माँस खाना ये रोज़ का काम है  , फिर उनके यहाँ तीन तलाक़ जैसी प्रथा है जिससे कोई भी मुस्लिम पति अपनी औरत को कभी भी तीन बार तलाक़ -तलाक़ -तलाक़ बोलकर घर से निकाल सकता है  । क्या ऐसे बेमेल समाज में रिश्ते सम्भव हैं  ? क्या केवल फ़िल्में देखकर ऐसे प्यार में पड़ना और जीवन बर्बाद करना सही है  ?

सोचिएगा  , ज़रूर सोचिएगा और कुछ कहना चाहें तो कमेंट्स में हमें जवाब ज़रूर दीजिएगा ।

By: Vinita Verma on Monday, April 3rd, 2017