जानिये कुलभूषण जाधव की मौत पर स्‍टे दिलाने वाले हरीश साल्‍वे की कहानी !

जाधव के लिए संकटमोचक बनकर उभरे हरीश साल्वे !!

ये तो सभी को मालूम ही है कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई फिलहाल आईसीजे कोर्ट में चल रही है और जिस तरह से कोर्ट ने भारत के पक्ष में फैसला सुनवाते हुए जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है. ये फैसला पाक के खिलाफ भारत की एक बड़ी जीत है लेकिन इन सब के पीछे सबसे बड़ा हाथ देश के नामी वकील हरीश साल्‍वे का है जो जाधव के लिए संकटमोचक बनकर उभरे हैं .

आईये आपको आज उनसे जुड़ी खास बाते बताते हैं –

आपको बता दें कि साल्वे कांग्रेस के कार्यकाल में मंत्री रहे एनकेपी साल्वे के बेटे हैं. बचपन से ही उनकी चाहत इंजीनियर बनने की थी. जब कॉलेज पहुँचे तो सीए में उनका इंटरेस्ट पनपा, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली और दो बार फेल हुए.साल्वे को कानूनी करियर में पिता के संपर्कों का खासा लाभ मिला.

एक बार दिलीप कुमार उर्फ लीजेंड्री खान पर कालाधन रखने के आरोप लगा तब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चिट्ठी भेजी और हर्जाने की मांग की और यहीं से उन्होंने अपने करियर का खाता खोला उस वक़्त वो अपने पिता का केस में हाथ बंटा रहे थे. साल था 1992 का जब साल्वे को दिल्ली होईकोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बना दिया था उन्होंने इसके बाद टाटा, महिंद्रा और अंबानी सरीखे देश के बड़े बिजनेस घरानों के लिए भी कोर्ट में केस लड़े.

पालखीवाला केस की सफलता के पीछे का कारण बताते हुआ कि केस की तैयारी करते वक़्त अपने पास पालखीवाला की फोटो रखते थे जिस वजह से उन्हें प्रेरणा मिलती थी. आपको बता दें कि गुजरात दंगा केस में सुप्रीम कोर्ट ने साल्वे को एमीकस क्यूरी क्र रूप में चुना था. यानी अदालती मित्र. जनहित के केसों में वे न्याय दिलाने में कोर्ट की सहायता करते हैं.