जानिये लेपाक्षी मंदिर के बारे में, रामायण काल से जुड़ा है इतिहास !!

आंध्र प्रदेश में एक ऐसा खास मंदिर है, जिसमें 70 से ज्यादा खंभे हवा में झूल रहे हैं। ये खंभे मंदिर को सहारा दे रहे हैं और साथ ही इनके नीचे अंतराल है। खंभों और जमीन के अंतराल में से कपड़ा निकाला जा सकता है। इस मंदिर के स्तम्भ बिना किसी सहारे के हवा में लटकें हुए हैं। यह मंदिर 1583 में विजयनगर के राजा के लिए काम करने वाले दो भाइयों विरुपन्ना और वीरन्ना ने बनाया था। यह भी कहा जाता है कि इसे ऋषि अगस्त ने बनाया था। इस मंदिर में शिव, विष्णु और वीरभद्र के पूजास्थल मौजूद हैं।
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यहाँ के झूलते खंभों को लेकर यह मान्यता प्रचलित हैं कि इन खंभों के नीचे से अपनी साड़ी या कपड़े निकालने पर मनुष्य की मनोकामना पूरी हो जाती हैं। लेपाक्षी गाँव के साथ रामायण की एक कथा प्रचलित हैं। सीता हरण के समय पक्षिराज जटायु ने रावण से युद्ध किया था| युद्ध में घायल होकर जटायु यहीं गिरें थे। जब भगवान राम ने जटायु को देखा तो कहाँ उठो पक्षी, जिसे तेलुगु में ‘ले पक्षी’ कहा जाता हैं। तभी से इस जगह का नाम लेपाक्षी पड़ गया। मंदिर परिसर के पास ही एक विशाल पैर की आकृति धरती पर अंकित हैं, जिसे भगवान राम के पैर का निशान मान कर पूजा जाता हैं।
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मंदिर के झूलते खम्बे इतने प्रसिद्ध है कि इसका रहस्य जानने एक ब्रिटिश इंजीनियर तक भारत आये थे| इंजीनियर ने बहुत कोशिश की, लेकिन इसका रहस्य जान नहीं पाया। मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी की एक विशाल प्रतिमा बनी हुई हैं। यह एक ही पत्थर से बनी देश की सबसे विशाल मूर्तियों में से एक मानी जाती हैं। मंदिर की दीवारों पर कई देवी-देवताओं और महाभारत रामायण की कहानियां अंकित हैं।
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By: Staff Writer on Wednesday, November 2nd, 2016