द्रौपदी की नामंजूरी के बाद किन 2 कन्याओं ने कर्ण से विवाह किया था ?

कर्ण की अनजानी कहानी

कर्ण महाभारत के सबसे प्रिय पात्रों में से एक है, ज्येष्ठ पाण्डव जो वैधता और सम्मान के लिए तड़पता रहा, एकमात्र व्यक्ति जो अर्जुन को हरा सके, एक अच्छा इंसान जिसने दुर्योधन को वफ़ादारी का वचन दिया। हालांकि कर्ण महाभारत के एक केंद्रीय पात्र था, लेकिन वह एक रहस्यमयी पात्र बनकर रह गया। महाभारत के लगभग सभी व्याख्या में जो मैंने पढ़ी हैं कर्ण की निजी ज़िन्दगी को बहुत कम उजागर किया गया है। चलिए कुछ रहस्यों पर प्रकाश डालते हैं।

वरुशाली: कर्ण की पहली पत्नी

वरुशाली
वरुशाली

वरुशाली दुर्योधन के सारथी सत्यासेन  की बहन थी। ऐसा माना जाता है की कर्ण के दत्तक पिता अधिरथ चाहते थे की कर्ण की शादी उससे हो। कर्ण की मृत्यु के बाद वरुशाली भी उसकी चिता के साथ सती हो गयी। दुर्योधन ने उल्लेख किया है की वरुशाली भी साधारण नहीं थी, वह भी कर्ण के समान ऊँचे चरित्र वाली थी।

सुप्रिया: कर्ण की दूसरी पत्नी

सुप्रिया
सुप्रिया

कर्ण की दूसरी पत्नी का नाम था सुप्रिया। इसके बारे में ज़्यादा कुछ तो नहीं कहा गया इस महान महाकाव्य में, बस इतना बताया गया है की वह दुर्योधन की पत्नी भानुमती की सहेली थी। वरुशाली के बारे में भी बहुत कम जानकारी है। स्त्री पर्व के जलाप्रदनिका पर्व में जब गांधारी ने युद्ध के मैदान पर नरसंहार का अफसोस जताया, तो उसने चार श्लोक एकमात्र औरत के नाम समर्पित किये जिसे वह कर्ण की पत्नी के रूप में पहचानती थी, लेकिन बिना नाम के। गांधारी ने कर्ण-सुप्रिया के पुत्रों के नाम का वर्णन किया है। इनके दो पुत्र थे – वृशासेन और सुशेन।

दिलचस्पी की बात यह है की काफी समय बाद तमिल साहित्य में कर्ण की कहानी का उच्चतर संस्करण प्रकट हुआ जहाँ कर्ण की पत्नी का नाम पोन्नारुवि बताया गया है। लेकिन कर्ण को ताज पहनाकर अंगा का रजा उसके सम्राट और घनिष्ट मित्र दुर्योधन ने बनाया था और अंगा और हस्तिनापुर दोनों ही उत्तर भारत में हैं। हो सकता है पोन्नारुवि नाम वरुशाली या सुप्रिया का ही विशेषण हो।

क्या कर्ण की पत्नी वरुशाली, द्रौपदी की सलाहकार थी? एक दृश्य जहाँ विशेष रूप से वरुशाली को पांचाली के साथ बात करते हुए दर्शाया गया है, ऐसा पहले कहीं ना देखा गया और ना ही जाना गया। जाहिर है, टीवी पर महाभारत इस महाकाव्य को नए आयामों के साथ पेश करने की कोशिश कर रहा था। कर्ण की पत्नी वरुशाली द्रौपदी के पास आती है और कुरु राज्य भवन को छोड़ कर अपने भाई के पास चले जाने का आग्रह करती है। लेकिन द्रौपदी यहीं रहकर परिस्थितियों का सामना करने का निर्णय लेती है। इस बार फिरसे युधिष्ठिर खुद को दुर्योधन से हार जाता है और चीर हरण का वृतांत शुरू होता है।

कविता केन की किताब ‘कर्ण’स वाइफ’ की कहानी कुछ और ही कहती है। यह बहुत ही दिलचस्प है क्योंकि यह कर्ण की दूसरी पत्नी, ऊर्वी के नजरिए से लिखी गयी है। ऊर्वी, पुकेया की राजकुमारी; शक्तिशाली राजा की एकलौती बेटी, और कुंती की पसंदीदा, पांडवों की माँ। यह किताब महाभारत की कहानी तबसे दर्शाती है जबसे द्रौपदी के स्वयंवर पर ऊर्वी की नज़रें अति सुन्दर कर्ण पर होती हैं। ऊर्वी को नीची जाती के राजकुमार से प्रेम हो जाता है और वह निर्णय लेती है की या तो वो इसी राजकुमार से शादी करेगी वरना कुवांरी रहेगी।

ऊर्वी अपनी माँ की इच्छा के खिलाफ़ जाकर शादी करती है। हालांकि ऊर्वी जिससे प्रेम करती है उसी से शादी तो कर लेती है लेकिन उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कर्ण की तरह ही नीची जात वाली उसकी पहली पत्नी और उसके भाई, सब राज घराने से आई ऊर्वी पर शक करते हैं।

By: Vandit Rastogi on Saturday, August 22nd, 2015

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