डोकलाम पर चीन को घेरने के लिए अब भारत अपना रहा है यह रणनीति,चीन को लगने वाला है झटका !

चीन की मुश्किलें बढ़ा सकती है भारत की ये रणनीति !!

चीन की मुश्किलें बढ़ा सकती है भारत की ये रणनीति..

भारत और चीन के बीच बढ़ता तनाव ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. दोनों देश पीछे हटने को तैयार नहीं है. जहाँ एक ओर चीन भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है वहीँ दूसरी ओर भारत ने सुकना स्थित 33वीं कोर से सैनिकों को सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर तैनात करना शुरू कर दिया है. रक्षा मंत्री जेटली इस मुद्दे पर भारत का रुख पहले ही स्‍पष्‍ट कर चुके हैं कि इस बार 1962 जैसी गलती नहीं होगी.

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मौजूदा खबर अनुसार अब भारत चीन की घेरने की रणनीति के तहत म्‍यांमार का भी सहारा लेने की कोशिश करने वाला है. इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी सितंबर में म्‍यांमार जाएंगे. बता दें कि म्यांमार में ऐसी विचारधारा वाले लोगों की संख्या बढ़ी है जो चीन पर निर्भरता के सख्त खिलाफ हैं. भारत के इस पड़ोसी देश के पास गैस का बहुत बड़ा भंडार है लेकिन अभी तक उसका दोहन चीन करता रहा है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीएम मोदी के इस दौरे के पीछे आसियान की बैठक है लेकिन उनकी यह यात्रा भारत की लुक ईस्ट नीति के तहत भी एक अहम कदम साबित होने वाली है. बीते दो वर्षों में भारत ने म्यांमार में चीन के असर को काटने में काफी सफलता हासिल की है. मोदी पहले ही कह चुके हैं कि भारत की लुक ईस्ट नीति के लिहाज से म्यांमार काफी अहम है.

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बता दें कि मोदी भारत के पूवरेत्तर राज्यों को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ना चाहते है ताकि वक़्त आने पर चीन को आसानी से घेरा जा सके. भारत के लिए सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि चीन म्यांमार में कारोबार से लेकर सैन्य सहयोग तक के मामले में भारत से काफी आगे है. लेकिन म्यांमार की नई सरकार कुछ बदलाव के संकेत देने लगी है. पिछले महीने म्यांमार के कमांडर इन चीफ भारत आए थे और सैन्य सहयोग पर चर्चा भी की थी. इतना ही नहीं उन्होंने म्यांमार ने पूर्वोत्तर के आतंकियों का सफाया करने से लेकर सड़क व रेल नेटवर्क बनाने के भारतीय प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया था.

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बताते चलें कि भारत चीन को घेरने के लिए कूटनीति के साथ-साथ दूसरे विकल्‍प भी खुले रखे हुए है. सिलीगुड़ी में 33वीं कोर की तीन डिवीजनों को भारत-चीन सीमा पर तैनात कर भारत ने अपनी यह मंशा भी साफ कर दी है. सैनिकों की तैनाती की यह प्रक्रिया 20-25 दिन पहले शुरू हुई थी. सिक्किम के उत्तरी और पूर्वी इलाकों में सीमा से 500 मीटर से दो किलोमीटर दूरी के स्थानों पर इन सैनिकों की तैनाती की गई है.