1947 में लाशों का ढेर लेकर पहुंची थी ट्रेन भारत, रुला देने वाली अनसुनी दास्ताँ !

दोस्तों हमारे देश के इतिहास के बारे में आपने अक्सर किताबों में पढ़ा होगा कि किस तरह से भारत पर अंग्रेजों ने अपना कब्जा जमा रखा था और जब भारतीयों ने अंग्रेजों को हिंदुस्तान से निकाल दिया था तो देश आज़ाद होने के बाद (1947) में भारत के कई टुकड़े हो गए थे और फिर वही दर्दनाक कहानी घटी जो हमे किताबों में पढने को मिलती आ रही है .

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आप यकीन नही करेंगे लेकिन उस समय जो नरसंहार हुआ था उसे देखने वाले शख्स ने जब 1947 के दौरान घटी घटना के बारे में बताया जिसे पढ़कर आपको सदमा लग सकता है इस शख्स का नाम बाल कृष्ण गुप्ता है जोकि उस दौरान रेलवे में कार्यरत थे. दरअसल बैसाखी के मेले में अन्तर्राष्ट्रीय ऐतिहासिक रेल मार्ग पर दौडती ट्रेन को देखकर बाल कृष्ण गुप्ता व सोहन सिंह की यादें ताजा हो गयी . जिसके बाद उन्होंने बताया कि उनके जमाने में भी ट्रेन यहीं से जाया करती थी और भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद बिगड़े हालात के दौरान दोनों देशों के कई लोग मारे गए थे.

इसके साथ ही कृष्ण गुप्ता ने बताया कि वे रेलवे में गार्ड थे और उनका काम था पाकिस्तान जाकर वहां से लोगों को भारत लाना. कृष्ण गुप्ता ने बताया कि उन्हें बड़े अधिकारियों ने आदेश दिया था कि पाकिस्तान के गंडा सिंह रेलवें स्टेशन पर भारतीय लोग फिरोजपुर आने को तैयार बैठे है ये कहकर उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया. जिस समय बाल कृष्ण ट्रेन से भारतीयों को लेकर हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए तो रास्ते में पाकिस्तान के कुछ शरारती तत्वों ने उनपर हमला कर दिया यहाँ तक कई लोगों को तेजधार हथियारों से भी काटा गया और तऔर उन दरिंदो ने मासूम बच्चो व महिलाओं को भी नही छोड़ा.
देखते ही देखते पूरी ट्रेन खून से भर गयी. बालकृष्ण जैसे-तैसे कुछ लोगों को बचाकर फिरोजपुर छावनी रेलवे स्टेशन पहुंचे. इस दिन को जब कभी वे याद करते है आज भी उनकी आँखें नम हो जाती है. अगर आपको इस कहानी को पढकर कुछ याद नही आया तो बता दें 1947 में जो जिस तरह की घटना हुई है ठीक वैसी ही गदर फिल्म में भी दिखाई गयी है.

By: Thakur Mintu on Saturday, July 15th, 2017