मोदी न होता तो सेना के आधुनिकीकरण की शुरुआत भी न होती

इस साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तानी सीमा के करीब हमारे तीस से भी अधिक सैनिक वीरगति को प्राप्त हो चुके हैं। इसके बाद ख़ास तौर से सोशल मीडिया में मोदी की कार्यक्षमता पर संदेह किया जाने लगा है। जबकि सेना बराबरी से जवाब दे रही है। अब आलोचक ये भी भूल चुके हैं कि सेना ने कुछ वक्त पहले ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को अंजाम दिया था। सेना हमारी रक्षक है। सेना से हर देशवासी का स्वाभाविक जुड़ाव होता है। सैनिक की शहादत पर हर व्यक्ति आक्रोशित होता है लेकिन इसके लिए बिना वास्तविकता जाने सरकार पर दोषारोपण ठीक बात नहीं है।

सभी जानते हैं कि जब मोदी सरकार ने शपथ ली थी उस समय हमारी सेनाएं ‘बुलेट प्रूफ जैकेट’ जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही थी। हथियारों के नाम पर पुरानी राइफले थी। विमान बेड़े में अत्याधुनिक विमान नहीं थे। असला-बारूद पर्याप्त मात्रा में नहीं था। ऐसी सेना को सुरक्षा का ‘जिरह बख्तर’ पहनाना आवश्यक था।

देश की खस्ता आर्थिक हालत देखते हुए उचित रक्षा बजट बनाना जरुरी था। मोदी को अपने दुष्ट पड़ोसियों पर आक्रामक प्रहार करने से पहले सुनिश्चित करना था कि देश की आन और सैनिकों की जान सलामत रहे। लेकिन ये प्रक्रिया महीनों में नहीं हो जाती, सेना को अत्याधुनिक बनाने में कई साल का समय लगता है।

इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता मोदी सरकार के आने के बाद सेना की सुध ली गई है। हमारी सेनाओं की स्थिति ये थी कि पुरानी असॉल्ट राइफले कई बार मौके पर काम ही नहीं करती थी। यहाँ तक कि पिछले साल की चर्चित सर्जिकल स्ट्राइक को भी पुराने हथियारों से अंजाम दिया गया था।

यूपीए सरकार के समय असॉल्ट राइफल तो छोड़िये, आधुनिक यूनिफॉर्म तक सैनिकों को उपलब्ध नहीं थी। यहाँ तक कि तत्कालीन रक्षा मंत्री ने तो कह दिया है कि हमे राफेल विमानों की आवश्यकता ही नहीं है। कितना घातक होता यदि इन्हे फिर सत्ता सौंप दी जाती, हम अपने देश की सुरक्षा और कमज़ोर कर लेते।

मोबाइल पर टिक-टिक कर मोदी के खिलाफ पोस्ट डालने वालों को कुछ बातें जान लेना बहुत आवश्यक है।

‘पेंटागन की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक वन बेल्ट, वन रोड और दक्षिण चीन सागर में जिस ढंग से चीन दखल दे रहा है वो भारत के लिए चिंता का विषय है। श्रीलंका और बांग्लादेश में चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश के जरिए भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है

अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए 33.6 करोड़ डॉलर की सहायता राशि का प्रस्ताव रखा है। इस बजट में पाकिस्तान के लिए 25.6 करोड़ डॉलर की असैन्य मदद और आठ करोड़ डॉलर की सैन्य मदद का प्रस्ताव दिया गया है।

कश्मीर में स्थानीय रूप से सक्रिय आतंकी गुट अलग से हमारी परेशानी बने हुए हैं। अधिकांश हमले छुपकर कायरों की तरह किये जाते हैं जिसके कारण हमारे सैनिक शहीद होते हैं। ध्यान रहे हमारे सैनिक आमने-सामने की लड़ाई नहीं लड़ रहे। हमारे प्रशिक्षित सैनिकों को धोखे से मारा जा रहा है और वह भी स्थानीय मदद से।

आज रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में रक्षा खरीद परिषद ने 15,935 करोड़ के रक्षा सौदों को अपनी मंजूरी प्रदान की है। इस लिस्ट में लाइट मशीन गन, असॉल्ट राइफल्स और स्नीपर राइफल्स आदि शामिल हैं। हथियारों की खरीदारी “फास्ट ट्रैक प्रक्रिया” के माध्यम से होगी ।

इसके अलावा सेना के तीनों अंगों के लिए 12,280 करोड़ की लागत से 7.4 लाख असाल्ट राइफल्स खरीदी जाएगी। सेना और वायुसेना के लिए 982 करोड़ में 5719 स्नाइपर राइफल्स की खरीद की इजाज़त दी है। शुरुआत में इनका असलहा भी खरीदा जाएगा लेकिन बाद में इनका गोला-बारूद देश में ही बनाया जाएगा।

आज यदि भारत के पास ब्रम्होस जैसी उत्कृष्ट मिसाइल है तो वह ‘मेक इन इंडिया’ की पहली परियोजना का सुखद परिणाम है। अमेरिका की ‘टॉम हॉक’ मिसाइल इसके सामने रद्दी है। भारतीय सेना और देश का सौभाग्य है कि नरेंद्र मोदी ने देश की कमान संभालकर सेना के आधुनिकीकरण की शुरुआत कर दी है। सेना तेज़ी से आधुनिक हो रही है लेकिन तीन ओर से देशविरोधी ताकतों के अभियान तेज़ हो गए हैं।

अपने ड्रॉइंग रूम में बैठकर मोदी की आलोचना करने से पहले ये देख लेना कि वहां वास्तविक परिस्तिथियाँ क्या हैं। सैनिक की शहादत उसे भी उतना ही हिलाती है जितना तुमको। सेना सशक्त हो रही है और आपको भी धैर्य रखना चाहिए। मोदी नए भारत की नींव रख रहे हैं। वे एक मजबूत सुरक्षा दीवार बना रहे हैं लेकिन उन्हें समय तो दीजिये।