हिंदू संत ने दिया था श्राप सपा के हो जाएँगे टुकड़े टुकड़े तो क्या ये उनका हो रहा प्रभाव ?

समाजवादी पार्टी के अंदर उथल पुथल मची है, हालत ठीक नहीं चल रहे हैं, हालाँकि काफ़ी लोग केवल इसको एक नाटक मानते हैं लेकिन जो भी हो ये तो तय है कि सब कुछ ठीक बिलकुल नहीं है।  कल से नया साल शुरू होते वाला है और इस नए साल में चुनाव भी होंगे लेकिन UP की सत्ता पर बैठी पार्टी में रोज़ एक नया ड्रामा देखने को मिल रहा है। कोई नहीं जानता ये सब कब ख़त्म होगा लेकिन इससे जुड़ा हुआ एक संदेश सोशल मीडिया में बेहद वायरल हो रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला ।

बता दें कि समाजवादियों में पड़ने वाली इस फूट की वजह हिंदू साधुओं और संतो केअखिलश यादव और उनके परिवार को दिए हुए श्राप को माना जा रहा है।   जब से ये झगड़े शुरू हुए हैं तब से ही एक पोस्टर सोशल मीडिया साइट्स पर खूब वायरल होता जा रहा है । इस पोस्टर पर लिखा है कि “एक और संत का श्राप फलित होता दिख रहा है।“ पोस्टर में ये भी बताया गया है कि SP में किस वजह से आपसी कलह हो रही है?और तो और पोस्टर में ख़ुलासा किया गया है कि वाराणसी में अखिलेश यादव  ने अपने सत्ता के नशे में चूर होकर साधुओं, संतों और बटुकों पर लाठीचार्ज करवाया था, जिस वजह से उस समय एक श्राप दिया गया था और ये उसी श्राप का नतीजा है जो आज सपा पार्टी में भयंकर फूट पड़ गयी है और फूट भी ऐसी की बाप और बेटा दोनों आमने- सामने  आकर भीड़ रहे हैं ।

पूरा क़िस्सा जनिये

ग़ौरतलब है कि इलाहबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में हिन्दुओं की भावनाओं का ना समझते हुए पिछले साल गंगा नदी में मूर्तियों को विसर्जित करने पर रोक लगा दी थी। और उसकी वजह से देश के सभी हिंदू साधू- संत बेहद नाराज हो गए थे क्यूँकि धार्मिक संगठन और साधू- संत अपनी आस्था के चलते मूर्तियों को गंगा नदी में ही विसर्जित करने पर अड़े हुए थे। ये भी बता दें कि गंगा में मूर्ति विसर्जन पर लगे प्रतिबन्ध के विरोध में स्वयं शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सबसे प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तरेश्वरानंद, पातालपुरी मठ के महंत बालक दास और कुछ अन्य संत बैठे हुए थे ।

लेकिन कहानी का असली भाग यही से शुरू होता है  हुआ यूँ कि 22 सितम्बर 2015 को UP की सरकार ने संतों से सुलह करने और उनको मनाने की जगह सत्ता के नशे में चूर होकर  यूपी पुलिस को आदेश दिया और फिर संतों -साधुओं पर जमकर लाठियाँ बरसाई। यही पर दमन का अंत  नहीं हुआ बल्कि पुलिस ने धारा 144 लगाते हुए धरने पर बैठे किसी को भी छोड़ा और सभी लोगों पर लाठीचार्ज किया।

इस लाठीचार्ज से बहुत से संत और आम लोग बुरी तरह से घायल हो गए थे। और पुलिस के इस हमले से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी बेहद बुरी तरह से घायल हो गए थे। वे  इस लाठीचार्ज की वजह से 9 दिनों तक अस्पताल में भी रहे थे। महंत बालकदास ने बताया था कि इसी कारण मैंने और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मिलकर सपा को श्राप दिया था कि समाजवादी  सरकार तिनके की तरह बिखर जाएगी।

और आप देख लीजिए उसके बाद से समाजवादी पार्टी , उसके नेताओं , मुलायम यादव के परिवार के साथ क्या हो रहा है । 

By: HStaff on Saturday, December 31st, 2016