वीडियो : अगर डेबिट कार्ड से पेमेंट करते हैं तो ये ख़बर पढ़कर ख़ुशी से उछल पड़ेंगे आप, लग गयी लाटरी !

मोदी सरकार ने देश की दिशा बदलने के लिए कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिससे जनता को शुरुआत में थोड़ी बहुत परेशानी उठानी पड़ी है लेकिन अगर उनके फैसलों को लम्बे समय तक रखकर सोचें तो ये देश की पुरानी छवि को बदल देंगी. मोदी सरकार का लगातार अपना फोकस डिजिटल इकोनॉमी पर बढ़ा रही है इसीलिए कैशलेस ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी हो रही है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के मुताबिक नवंबर महीने में यूपीआई ट्रांजेक्शन की तादाद 38 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 10.5 करोड़ ट्रांजेक्शन पर पहुंच गई.

मौजूदा खबर अनुसार बता दें कि आरबीआई ने डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन चार्जेज को लेकर अहम कदम उठाया है. रिजर्व बैंक ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को वाजिब स्तर पर लाने के लिए यह फैसला लिया है. इसके तहत डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन के लिए अलग-अलग मर्चेंट डिस्काउंट दरें तय की हैं. अगर आने वाले दिनों में एमडीआर चार्जेज बैंक घटाते हैं, तो इसका फायदा आम आदमी को भी मिलेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एमडीआर चार्जेज कम होने से जब भी आप प्वाइंट ऑफ सेल्स मशीन से डेबिट कार्ड से लेनदेन करेंगे, तो आपको एक्स्ट्रा फीस कम या न के बराबर भरनी पड़ेगी. आरबीआई के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक 20 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार वाले छोटे मर्चेंट के लिए एमडीआर शुल्क 0.40 फीसदी तय की गया है. इसमें हर लेनदेन पर शुल्क की सीमा 200 रुपए रहेगी. यह शुल्क डेबिट कार्ड से ऑनलाइन या पीओएस के जरिए लेनदेन पर लागू होगा.

गौरतलब है कि क्यूआर कोड आधारित लेनदेन में मर्चेंट को 0.30 फीसदी शुल्क चुकाना पड़ेगा. इसमें भी हर लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 200 रुपए रहेगी. अगर किसी मर्चेंट इकाई का सालाना कारोबार 20 लाख रुपए से ज्यादा होगा तो उसका एमडीआर शुल्क 0.90 फीसदी होगा. इसमें प्रति लेनदेन शुल्क की सीमा 1,000 रुपए रहेगी. इसमें क्यूआर कोड के जरिए लेनदेन पर शुल्क 0.80 फीसदी और अधिकतम शुल्क राशि 1000 रुपए ही रहेगी.

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बताते चलें कि कोई बैंक किसी मर्चेंट या व्यापारिक ईकाई को डेबिट और क्रेडिट कार्ड सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जो शुल्क लगाता है उसे ही मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर कहते हैं. एनपीसीआई यूपीआई प्लेटफॉर्म को चलाता है. नवंबर में यूपीआई के जरिए ट्रांजेक्शन की वैल्यू भी 37% बढ़कर 9,679 करोड़ रुपये हो गई, जो अक्टूबर महीने में 7,057 करोड़ रुपये थी.