अपहरण कर 500 फ़ीट गहरी खाई में फेंका, पांच दिन जंगल में पड़ा रहा, फिर भी ज़िंदा रहा

इंदौर। प्रेम प्रसंग के चलते तीन दोस्तों ने पहले एक युवक का अपहरण किया और उसे 500 फ़ीट गहरी खाई में मरने के लिए फेंक दिया। इसे ईश्वरीय चमत्कार ही कहा जाएगा कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी युवक के प्राण नहीं निकले। पांच दिन तक वह अपनी मौत से संघर्ष करता रहा जब तक कि उस मदद नहीं पहुंच गई।

ये मामला इंदौर के परदेशीपुरा के एक युवक के प्रेमप्रसंग से जुड़ा हुआ है। सागर के एक स्कूल संचालक का बेटा मृदुल उर्फ़ मनु 7 जनवरी को लापता हो गया था। मनु अपने दोस्त के साथ क्लर्क कालोनी में किराये से एक मकान में रहता था। मनु के लापता होने के बाद उसका साथी थाने में रिपोर्ट लिखवाने गया था लेकिन पुलिस से खास मदद नहीं मिली। दो दिन के बाद मनु के पिता इंदौर आए और अपने स्तर पर उसे खोजना शुरू कर दिया। एक जगह के सीसीटीवी फुटेज में पता चल गया कि मनु को सफ़ेद कार में अपहरण कर ले जाया जा रहा है। इसके बाद पिता ने तुरंत पुलिस को ये बात बताई। अपहरण के तीन दिन बाद पुलिस सक्रिय हुई और गंभीरता से जाँच शुरू कर दी।सीसीटीवी और कॉल डिटेल्स से पता चला
मनु के कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी आकाश रत्नाकर निवासी नौलखा, रोहित उर्फ पीयूष परेता निवासी कुशवाह श्रीनगर और विजय परमार निवासी राजदार गांव को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आकाश ने अपहरण व मनु का खाई में फेंकना कबूल कर लिया। आरोपी क्षेत्र की एक लड़की के पीछे चार साल से लगा हुआ था। उसे शक था कि मनु के कारण लड़की उससे दूर हो रही है। इसलिए साथियों की मदद से हत्या का षड्यंत्र रचा और उसे अगवा कर जंगल में ले गए।
मरा समझ खाई में फेंका
तीनों आरोपी मनु को लेकर मुआरा घाट पहुंच गए। उन्होंने मृदुल के हाथ-पैर बांधे और मुंह पर टैप चिपकाया। कार से उतारकर पैदल सुनसान जगह ले गए। उसके सिर पर भारी पत्थरों से वार किए। काफी देर तक हलचल नहीं होने पर मरा समझ उसे खाई में धकेल दिया। वह करीब 500 फीट नीचे जा गिरा। घटनास्थल से 500 फीट गहराई में मनु पहाड़ियों के बीच से बहने वाले झरने की सूखी नाली में औंधे मुंह पड़ा था। उसे जिंदा देख मौके पर डॉक्टरों को बुलाया। दोपहर 12 बजे ऊपर लाकर उसे इंडेक्स मेडिकल कॉलेज पहुंचाया।


डॉक्टर हैरान हो गए
अब मनु का इलाज अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टर भी हैरान हैं कि 500 फ़ीट नीचे खाई में गिरने के बाद भी वह जीवित कैसे रहा। निर्जन जंगल में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसने पांच रात कड़ाके की ठण्ड सही। ठण्ड से उसके हाथ पैर अकड़ गए थे। हालाँकि घाव घावों में संक्रमण नहीं हुआ और वह साँस लेता रहा