क्या आप रावण के बारे ये आश्चर्यजनक तथ्य जानते हैं??

  1. रावण जन्म से ना एक राक्षस और ना ही एक ब्राह्मण था. वह ऋषि विशरवा का पुत्र था, जो एक ब्राह्मण थे. उसकी माँ कैकसी एक क्षत्रिय राक्षसी थी. उसे ब्रह्म राक्षस के नाम से जाना जाता था. एक व्यक्ति जिसके पास ब्राह्मण की बुद्धि हों और राक्षस की शक्ति थी.
  2. रावण का पुष्पक विमान बहुत प्रसिद्द है. जिसे भगवान राम ने सीता को बचाने के बाद वापिस लौटने के लिए इस्तमाल किया था. लेकिन आप लोग ये नहीं जानते की रावण के पास ओर भी कई ऐसे हवाई जहाज और उनके उतरने के लिए हवाईअड्डे थे. आज भी श्रीलंका में कुछ ऐसे हवाईअड्डे है जिनको कहा जाता है कि रावण ने इस्तमाल किये थे.
  3. रावण बहुत ज्ञानी था. वह चारों वेदों और 6 शास्त्रों का पंडित था. रावण के दस सिर उसके वेदों और शास्त्रों के अपार ज्ञान के सूचक है. उसे खबोल विज्ञान का भी सबसे ज्यादा ज्ञान था. कहा जाता है कि ग्रह उसकी इच्छा से चलते थे. उसका एक उदाहरण यह है कि अपने बेटे इन्द्रजीत के जन्म के समय उसने नौ ग्रहों को एक पंक्ति में रहने के आदेश दिए थे ताकि उसका बेटा एक महान व्यक्ति बनें लेकिन किसी वजह से शनि ने ऐसा नहीं किया तो बाद में रावण ने उससे बदला लिया.
  4. रावण को एक कठोर राजा माना जाता है लेकिन यह सत्य नहीं है. यह सच है कि उसने अपने भाई कुबेर से जबरदस्ती लंका ली थी पर लंका का सबसे प्रभावशाली राजा साबित हुआ. उसके शाशनकाल को श्रीलंका का सबसे अधिक उन्नति का समय माना गया है.
  5. रावण की शक्ति बेजोड़ थी. धर्मग्रंथो से पता चलता है कि वो समुद्रों को हिला सकता था और पर्वतों के शिखरों को तोड़ सकता था. उसने इंद्र के व्रज, ऐरावत हाथी के दांतों और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से भी लड़ाई की थी. इस दुनिया में सिर्फ दो नश्वर उसे शारीरिक युद्ध में हरा सकते थे. एक थे कार्तिवीर अर्जुन और दुसरे वानर बाली.
  6. रावण काफी हद तक अजय था. ब्रह्मा जी ने उसको वरदान दिया था कि कोई देवता, राक्षस, किन्नर, या गन्धर्व उसको कभी नहीं मार सकेगा. भगवान शिव ने भी अमर होने का दिव्य अमृत दिया था.
  7. उसकी शिव भक्ति के बारे में सब जानते है. लेकिन ये बात बहुत कम लोग जानते है कि उसने एक बार शिवजी के निवास स्थान कैलाश पर्वत को उखाड़ने की कोशिश की थी. तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे के नीचे उसे दबा लिया था. उसे इस प्रकार अपनी गलती के नौ साल तक कष्ट उठाना पड़ा था. इसके बाद वो भगवान शिव का सच्चा भक्त बन गया और उसी दौरान भगवान शिव ने उसे रावण नाम दिया.
  8. रावण तीनों लोकों का सम्राट था. अपनी शक्ति और बुद्धि के साथ उसने सिर्फ मनुष्यों को ही नहीं बल्कि देवताओं और राक्षसों को भी जीत लिया था, जिससे वह तीनों लोकों में सर्वशक्तिमान बन गया था.
  9. रावण संहिता नामक पुस्तक जिसे हिन्दू ज्योतिष का पावन ग्रन्थ माना जाता है सबसे पहले रावण ने लिखी थी.
  10. कहा जाता है कि वर्षों की पूजा और तपस्या से रावण इतना शक्तिशाली हो गया था कि उसने सूर्योदय और सूर्यास्त को भी अपने वश में कर लिया था.

 

By: Staff Writer on Wednesday, January 11th, 2017

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