EXPLOSIVE VIDEO : गोरखपुर की त्रासदी वो नहीं है जो दिख रही है,जानिए पूरा सच जो मीडिया नहीं दिखाने वाली !

मीडिया दिखा रहा है आधा-अधूरा सच !

ये विडियो जो हम आपको दिखाने जा रहे हैं ये विडियो उस राष्ट्रवादी की है जो हमेश तथ्यों के आधार पर बात करता है आज इस विडियो के माध्यम से आपको वो सभी तथ्य दिख जाएंगे जो मीडिया और विरोधियों ने सभी से छुपाए क्योंकि इनका काम है बीजेपी को बदनाम करना,लेकिन अपनी तरफ से विडियो के अलावा हम कुछ तथ्य आपके सामने रखेंगे !

उत्तरप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन की संयुक्त पत्रकार वार्ता में यह तथ्य उजागर हुआ कि ऑक्सीजन सप्लाई करनेवाले सप्लायर ने 1 अगस्त को अपने भुगतान के लिए लिखा था. 5 अगस्त को सरकार ने भुगतान की राशि जारी कर दी थी।

BRD मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आरके मिश्र को वह राशि 7 अगस्त को प्राप्त हो गई थी। लेकिन गैस सप्लायर को उसने भुगतान 11 अगस्त को किया था। 11अगस्त अर्थात बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू होने और उसपर हंगामा मच जाने के बाद। 7अगस्त से 11अगस्त तक, बच्चों की मौतों का सिलसिला प्रारम्भ होने तक भुगतान क्यों रोके रहा था डॉ आरके मिश्रा.?


इसके अलावा पत्रकार वार्ता में यह भी उजागर हुआ कि गैस सप्लाई 10 तारीख की रात 11:30 से रात डेढ़ बजे तक बाधित हुई।अर्थात ऐसे समय जब कोई दूसरा विकल्प ही उपलब्ध ना हो सके। अस्पताल में गैस की उपलब्धता की इस स्थिति के प्रति प्रिंसिपल 10अगस्त को पूरे दिन क्या करता रहा.? यह कुछ सवाल बहुत कुछ कह रहे हैं।निचे दिया स्क्रीनशॉट दैनिक भास्कर से लिया गया है लेकिन दलाल मीडिया टीवी पर ये नहीं दिखाने वाली.

 क्या अखिलेश और योगी में वाकई कोई फर्क नही है ??

दिमागी बुखार से पूरे वर्ष भर मौतें नहीं होती.इस बीमारी का मौसम केवल 4 महीने(जून जुलाई अगस्त सितम्बर) का होता है।जो अखिलेश यादव योगी अदित्यनाथ से इस्तीफा मांग रहे हैं उनके 5 बरस के शासन में पूर्वी उत्तरप्रदेश में दिमागी बुखार से 4982 बच्चों की मौत हुई। अर्थात 1245 मौत प्रतिवर्ष। 311 मौत प्रतिमाह तथा 10 मौत प्रतिदिन।

उल्लेखनीय है कि योगी सरकार के अबतक के शासनकाल में पिछले 2 दिनों में हुई मृत्यु समेत दिमागी बुखार से हुई मौतों की संख्या का औसत 4-5 मृत्यु प्रतिदिन हैं.पूर्वी उत्तरप्रदेश में दिमागी बुखार, इंसेफेलाइटिस से प्रतिवर्ष होनेवाली मौतों का आंकड़ा पिछले कई दशकों की तुलना में इस वर्ष सर्वाधिक न्यूनतम स्तर पर है। अगर ये कहूं कि नगण्य है तो शायद अतिशयोक्ति नहीं होगी।


यह आंकड़ा अनायास या स्वतः घटकर इतने न्यूनतम स्तर पर नहीं पहुंच गया। इसके पीछे योगी सरकार द्वारा युद्धस्तर पर की गई उन तैयारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है जिनकी निरन्तर समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं कर रहे थे।लेकिन आज हर न्यूज चैनल चिल्ला रहा है कि पिछली सरकार और इस सरकार में कोई फर्क नहीं है।

उपरोक्त सच्चाई पढ़ने के पश्चात यह निर्णय आप करिये कि क्या अखिलेश और योगी सरकार में वाकई कोई फर्क नहीं है.?