डच स्कूलों में जो हो रहा है, जानकार भारत के सेक्युलर बेहोश न हो जायें!

भारत में अंग्रेजी स्कूलों का बोलबाला है, गरीब लोग ही अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं! और वहां भी पाश्चात्य संस्कृति की तरफ ही झुकाव देखने को मिलता है! केवल आरएसएस स्कूलों में ही भारत की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं! संस्कृत भाषा जिसे सभी भाषाओं की जननी कहा जाता है, उसे भारत में केवल एक विषय बना कर पढ़ाया जाता हैं!

भारत के अंग्रेजी स्कूलों में तो खासकर, इसाई स्कूलों में तो संस्कृत पढ़ा ही नहीं सकते! लेकिन आपको ये जानकारी हैरानी होगी की विदेशी स्कूलों में और वो भी छोटी कक्षा से बच्चों को संस्कृत, गीता पढ़ाना अनिवार्य है और उसका अर्थ भी समझाया जाता है! मगर भारत में बहुत कम बच्चों को संस्कृत के मंत्र आते होंगे!अभी भी संस्कृत अपने ही देश में संघर्ष कर रही है!

भारत के स्कूलों में संस्कृत पढ़ाना हमेशा ही विवाद का विषय रहा है, इस पर कभी भी एक मत फैसला नहीं आया! इस मुद्दे पर सांप्रदायिक दंगे हो जाएंगे, देश के तथाकथित सेक्युलर और लिबरल्स मारने-मरने पर आ जाएंगे!

देखिए कैसे ये डच स्कूलों में पढ़ने वाले ये छोटे बच्चे पूरी तन्मयता से संस्कृत और गीता के मंत्र पढ़ रहे हैं!

By: Ankita on Monday, October 24th, 2016

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