करवा चौथ का चन्द्रमा देखने से पहले भूल कर भी नहीं करें ये 5 गलतियाँ-करवाचौथ के उपाय !

जानिए क्या है करवाचौथ के व्रत को सफल बनाने की विधि ?

करवा चौथ का व्रत केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही करने का अधिकार है, इसलिए जिनके पति जीवित होते हैं, केवल वे स्त्रियां ही ये व्रत करती हैं. हिंदू धर्म में करवा चौथ नारी के जीवन का सबसे अहम दिन होता है जिसे भारतीय सुहागिन स्त्रियां एक पर्व के रूप में मनाती हैं.

पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखकर व चंद्रमा की पूजा-अर्चना करती हैं, तथा भगवान चंद्रमा से अपने पति की लम्‍बी आयु का वरदान मांगती हैं. स्त्रियों के लिए यह व्रत सुबह ब्रह्ममुहूर्त से शुरू होकर रात्रि में चंद्रमा-दर्शन के साथ संपूर्ण होता है. भारतीय स्त्रियों के लिए करवा चौथ का ये व्रत उनके पति के प्रति आस्था, प्यार, सम्मान व समर्पण को प्रदर्शित करता है.

करवा चौथ के दिन महिलाऐं अपने पति की लम्‍बी उम्र की कामना के साथ दिन भर निर्जला उपवास रखती हैं. करवा चौथ से सम्‍बंधित कथा-कहानियाँ सुनती-सुनाती हैं तथा रात्रि में चंद्र उदय होने पर उसकी पूजा-अर्चना कर पति के हाथों से पानी का घूंट पीकर अपना उपवास पूर्ण करती हैं.सूरज के उदय होने से पहले नहाकर व्रत का संकल्प लें और घर के बड़ों द्वारा दी गई सरगी खाएं.

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सरगी में मिठाई, फल, सेंवई, पूड़ी और साज-श्रृंगार का सामान दिया जाता है. सरगी में प्याज और लहसुन से भोजन बिल्कुल भी ना खाएं. सरगी के बाद करवाचौथ का निर्जला व्रत का आरंभ हो जाता है. माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी का ध्यान करते रहना चाहिए.

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By: HStaff on Sunday, October 8th, 2017