कांग्रेस के डीएनए में ‘राष्ट्रभक्ति’ नाम का तत्व ही नहीं है

कुख्यात कांग्रेसी नेता मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने प्रिय देश कराची जाकर विवादास्पद बयान दे आए हैं। अय्यर ने कहा कि वह पाकिस्तान को उतना ही प्यार करते हैं जितना वह भारत को करते हैं। अय्यर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान बातचीत के रास्ते खोलकर रखना चाहता है इसपर उन्हें गर्व है लेकिन भारत सरकार ऐसा नहीं कर रही जिसका उन्हें दुख है। अय्यर का ये बयान कांग्रेस पार्टी को नई मुसीबत में डालने जा रहा है। भाजपा ने तुरंत कांग्रेस पर मोर्चा खोल दिया है और कांग्रेस अब तक अय्यर के बयान की समीक्षा ही कर रही है।

ये दूसरी बार है जब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणिशंकर पाकिस्तान जाकर भारत की नाक कटाने का प्रयास कर चुके हैं। अब ये बात पार्टीवाद से बहुत आगे जा चुकी है। आज खुद कांग्रेसी खेमे की ओर से अय्यर की प्राथमिक सदस्य्ता रद्द करने की मांग उठाई गई है। कांग्रेसी नेता वी हनुमंत राव ने अय्यर को पार्टी से निकालने के लिए राहुल गांधी को पत्र भी लिख दिया है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था लेकिन पार्टी की प्राथमिक सदस्यता उन्हें अब भी मिली हुई है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी का लचर रवैया दुबारा देखने में आया है। उनको दुश्मन देश में जाकर घोर विवादास्पद बयान दिए हुए चौबीस घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन कांग्रेस ने उन्हें अब तक बाहर नहीं किया है।

टीवी पर आए कांग्रेस प्रवक्ता कह रहे हैं इस मामले की जांच करेंगे और पार्टी के संविधान के मुताबिक कार्रवाई होगी। इसका साफ़ मतलब ये हुआ कि कांग्रेस अय्यर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी। देश का पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस का वरिष्ठ नेता पाकिस्तान में एक साहित्य सम्मेलन में भाग लेने जाता है और भारत की केंद्र सरकार के खिलाफ बोलता है लेकिन पार्टी उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती। क्या इसका कारण ये है कि कांग्रेस का मूल चरित्र ही ‘पाकिस्तान परस्त’ है। यदि इस प्रकरण में कांग्रेस अध्यक्ष त्वरित निर्णय लेकर अय्यर को पार्टी से बाहर फेंक देते तो देश में उनके निर्णय की निश्चित ही प्रशंसा होती लेकिन एक वक्त में सोनिया गाँधी के विश्वसनीय रहे अय्यर को ऐसे तो बाहर नहीं फेंका जा सकता।

कांग्रेस पार्टी कह रही ये अय्यर का निजी बयान है। जब तक अय्यर पार्टी के प्राथमिक सदस्य बने हुए हैं, तब तक कांग्रेस उनके इस बयान से खुद को कैसे अलग कर सकती है। ये बात निश्चित है कि मणिशंकर अय्यर का ताज़ा देश विरोधी बयान कांग्रेस के लिए भारी मुसीबत बनेगा। इस मुसीबत से छुटकारे के लिए राहुल गांधी कोई निर्णय लेना भी चाहे तो राजमाता उन्हें ऐसा करने नहीं देगी। कांग्रेस के डीएनए में ‘राष्ट्रभक्ति’ नाम का तत्व ही नहीं है।