सनसनीख़ेज़ : जो यहाँ रुका तुरंत बन गया पत्थर, इस शाप‍ित मंदिर में जाने से कतराते है लोग !

भारत का सबसे रहस्यमयी मंदिर जहा जो रुका बन गया पत्थर, कभी यहाँ मत रुकना !

धर्म, भक्ति, अध्यात्म और साधना का देश है भारत, जहां प्राचीन काल से पूजा-स्थल के रूप में मंदिर विशेष महत्व रखते रहे हैं. यहां कई मंदिर ऐसे हैं जहां विस्मयकारी चमत्कार भी होते बताए जाते हैं. जहां आस्थावानों के लिए वे चमत्कार दैवी कृपा हैं तो अन्य के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय. लेकिन आज हम एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहें जिसका संबंध न तो वास्तु से है, न खगोल विज्ञान से और न ही खजाने से, इस मंदिर का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है.

मौजूदा खबर अनुसार बता दें कि राजस्थान के बाड़मेर में स्थित किराडू अपने मंदिरों की शिल्प कला के लिया विख्यात है. किराडू को “राजस्थान का खजुराहो” भी कहा जाता है लेकिन किराडू को खजुराहो जैसी ख्याति नहीं मिल पाई क्योंकि यह जगह पिछले 900 सालों से वीरान है और आज भी यहां पर दिन में कुछ चहल–पहल रहती है पर शाम होते ही यह जगह वीरान हो जाती है, सूर्यास्त के बाद यहां पर कोई भी नहीं रुकता क्योंकि जो वहां रुकता है वो अगले दिन पत्थर का बना हुआ मिलता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यहां के लोगों की मान्यता है कि इस शहर पर एक साधु का श्राप लगा हुआ है. मान्यता के अनुसार करीब 900 साल पहले परमार राजवंश यहां राज करता था. उन दिनों इस शहर में एक ज्ञानी साधु भी रहने आए थे. यहां पर कुछ दिन बिताने के बाद साधु देश भ्रमण पर निकले तो उन्होंने अपने साथियों को स्थानीय लोगों के सहारे छोड़ दिया.

गौरतलब है कि आश्रम में एक दिन सारे शिष्य बीमार पड़ गए और बस एक कुम्हारिन को छोड़कर अन्य किसी भी व्यक्ति ने उनकी देखभाल नहीं की. साधु जब वापस आए तो उन्हें यह सब देखकर बहुत क्रोध आया. साधु ने कहा कि जिस स्थान पर दया भाव ही नहीं है वहां मानवजाति को भी नहीं होना चाहिए, इसके बाद उन्होंने संपूर्ण नगरवासियों को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया. जिस कुम्हारिन ने उनके शिष्यों की सेवा की थी, साधु ने उसे शाम होने से पहले यहां से चले जाने को कहा और यह भी सचेत किया कि पीछे मुड़कर न देखे.

देखिये वीडियो !!

बताते चलें कि साधु के कहने के बावजूद कुम्हारिन ने कुछ दूर चलने के बाद पीछे मुडकर देखा और वह भी पत्थर की बन गई. इस श्राप के बाद अगर शहर में शाम ढलने के पश्चात कोई रहता था तो वह पत्थर का बन जाता था और यही कारण है कि यह शहर सूरज ढलने के साथ ही वीरान हो जाता है. अब यह कहानी कितनी सही है और कितनी गलत इसका तो पता नहीं.