नाथूला में भारत ने ढेर किए थे चीन के 300 सैनिक, इस युद्ध की बात भी नहीं करता ड्रैगन !

भारतीय सैनिको ने छुडाये थे चीनियों के पसीने !

यहाँ भारत ने चीन को दिखाई थी उसकी औकात, इसलिए आज भी नाथूला का नाम सुनकर बौखला जाता है ड्रैगन !

पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच माहौल कुछ ठीक नही चल रहा था और इसका मुख्य कारण डोकलाम में भारत और चीन की सेना के बीच चल रहा विवाद था . आपको बता दें कि इस बीच चीन ने भारत को बहुत बार धमकियां भी दी . वह बार बार भारत को 1962 युद्ध की याद दिला रहा था .

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लेकिन आज हम आपको उस लड़ाई के बारे में बताने जा रहे है जोकि डोकलाम की थोड़ी दूरी पर स्थित नाथू ला में हुई थी . दरअसल चीन इस युद्ध जिक्र नही करता क्यूंकि इस लड़ाई में भारतीय जवानो ने चीनियों को धूल चटा दी थी . चार दिन की इस लड़ाई में करीबन 300 चीनी सैनिक मारे गये थे . आज हम आपको इसी के बारे में कुछ बाते बताने जा रहे है .

समद्र तल से 14,200 फीट ऊपर स्थित नाथूला तिब्बत-सिक्किम सीमा का अहम दर्रा है . यहाँ   करीब 30 मीटर की दूरी पर चीनी और भारतीय सैनिक तैनात रहते हैं . भारत और चीन की 3,488 किलोमीटर लम्बी सीमा पर नाथू ला में दोनों देशों के सैनिक सबसे करीब होते हैं . इस दर्रे के उत्तरी तरफ चीन का नियंत्रण है और दक्षिणी तरफ भारत का .

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चीन ने 1965 के युद्ध के बाद भारत को नाथू ला और जेलेप ला दर्रा खाली करने के लिए चेतावनी दी थी . जब भारतीय सेना के पास ये खबर पहुंची तो उसने जेलेप ला दर्रा खाली कर दिया जिस पर आज भी चीन का कब्जा है लेकिन मेजर जनरल सगत सिंह ने नाथू ला दर्रा खाली करने से इनकार कर दिया . चीनियों ने नाथू ला में लाउडस्पीकर से 1962 जैसे अंजाम के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी . सगत सिंह ने उनकी इस चेतावनी को भाव नहीं दिया जिससे चीनी बौखला गये .

साल 1967 की शुरुआत से ही चीन भारतीय इलाके पर कब्जे के लिए धमकी और घुसपैठ सभी प्रकार के हथकंडे अपना रहा था . इसके विपरीत भारत ने अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पर तीन परतों वाली कंटीली बाड़ लगाने का फैसला किया . इसके विरोध में करीब 75 चीनी सैनिक उस इलाके में पहुंच गये और वहां इसका विरोध करने लगे .

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भारतीय सेना चीनियों की इस हरकत को पूरी सतर्कता के साथ देखती रही . करीब एक घंटे बाद चीनी वापस लौट गये . उसके बाद भी कई बार चीनियों ने ऐसी ही हरकतें कीं . 10 सितंबर को चीन ने भारतीय दूतावास को कड़ी चेतावनी भेजी कि यदि भारतीय सैनिक उकसाने वाली घुसपैठ करेंगे तो उसके गंभीर परिणाम के लिए भारत जिम्मेदार होगा .

उसके अगले दिन बाड़ लगाने का काम शुरू हुआ तो चीनी सैनिको ने इसे रुकवाना चाहा लेकिन जब भारतीय सैनिक नही माने तो चीनियों ने गोली चला दी जो राय सिंह को लग गयी . अपने कमांडिंग अफसर को घायल देख भारतीय इंफैंट्री बटालियन ने चीनी पोस्ट पर हमला कर दिया . इसमें दो भारतीय अफसरों समेत कई सैनिक मारे गये . उसके बाद भारतीय सैनिकों ने जवाबी गोलीबारी की और सभी नजदीकी चीनी चौकियों को मिट्टी  में मिला दिया . भारत की जवाबी कार्रवाई में बड़ी संख्या में चीनी सैनिक मारे गये . भारत के इस मुंहतोड़ जवाब से चीनी भौंचक रह गये .