Big Breaking: CBI कर रही है बोफोर्स केस को फिर से खोलने की SC में अपील, बढ़ सकती है गाँधी परिवार की मुश्किलें !!

सुप्रीम कोर्ट में फिर खुल सकता है बोफोर्स केस, CBI ने की अपील..

कांग्रेस ने भारत को हमेशा से लूटा है और आज़ादी के बाद से किसी न किसी तरीके से भारत का पैसा भारत की बर्बादी पर ही लगाया है. बोफोर्स घोटाला भी गाँधी परिवार की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जिसने भारत देश को लूटने में कोई कमी नहीं छोड़ी है. राष्ट्रीय राजनीति में बोफोर्स के विवादित मुद्दे की वापसी होती दिख रही है. इस केस पर दोबारा सुनवाई करने की अपील पर सुप्रीम कोर्ट इस महीने विचार कर सकता है.

 

बीजेपी ने SC से की बोफोर्स केस को दोबारा खोलने की मांग !!

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बोफोर्स मामले पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील बीजेपी सदस्य और एडवोकेट अजय अग्रवाल ने की है. अग्रवाल ने स्पेशल लीव पिटीशन की जल्द सुनवाई की मांग की है. यह याचिका सितंबर 2005 से लंबित है. बता दें कि बोफोर्स केस के आरोपियों को दिल्ली हाई कोर्ट ने मई 2005 में बरी कर दिया था.

क्या है बोफोर्स केस !!

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बोफोर्स केस 1987 में सामने आया था. स्वीडन से तोप खरीदने के सौदे में रिश्वत के लेनदेन के आरोपों में तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी और दिवंगत इतालवी कारोबारी ओतावियो क्वात्रोकी के नाम घिर गए थे. 1987 में बोफोर्स कांड का खुलासा स्वीडन की एक रेडियो सर्विस ने किया था. उन्होंने बताया था कि स्वीडन की एक हथियार कंपनी ने इंडियन आर्मी को बोफोर्स तोप सप्लाई करने का डील फाइनल करने के लिए 80 लाख डॉलर की दलाली चुकायी थी.

क्यों बदली सीबीआई की राय !!

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बता दें कि 2005 से इस मुद्दे से जुड़ी सीबीआई की फाइल्स और फाइल नोटिंग्स से पता चलता है कि 2006 में सीबीआई के तत्कालीन डायरेक्टर ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के खिलाफ दलील दी थी. इस साल जनवरी में हालांकि रुख बदल गया, जब डायरेक्टर ने एजेंसी के टॉप ऑफिसर्स की राय से सहमति जताई है.यह निर्णय इस लिहाज से अहम है कि इस मामले में सीबीआई प्रतिवादी भी है और बोफोर्स केस की जांच एजेंसी भी.

क्या है सीबीआई के दस्तावेज में !!

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गौरतलब है कि सीबीआई के दस्तावेजों से पता चलता है कि इसी साल 10 जनवरी को सीबीआई ने डायरेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मीटिंग करते हुए 12 साल पुरानी बोफोर्स फाइल का रिव्यू किया, जिससे पता चला कि अपील नहीं करने का सीबीआई का 2006 वाला निर्णय ‘सशर्त’ था यानी रिव्यू की गुंजाइश है. अब सीबीआई इस केस को दोबारा खोलने के लिए SC में अपील कर रही है.

By: jagjit singh on Saturday, August 12th, 2017