सेना प्रमुख बिपिन रावत का बड़ा खुलासा, चीन एक बार फिर से कर रहा युद्ध की तैयारी !!

चीन कर रहा युद्ध की तैयारी, कभी भी हो सकती है जंग, भारत भी तैयार…

सभी जानते हैं कि सिक्किम, चीन और भूटान सीमा पर स्थित डोकलाम पठार पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अतिक्रमण के बाद 16 जून को दोनों देशों की सेनाओं के बीच गतिरोध पैदा हो गया था. चीन ने इस इलाके में सड़क का निर्माण शुरू कर दिया था. उसने भूटान के इस इलाके पर अपना दावा जताया था. चीन के निर्माण रोकने के बाद दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से यह गतिरोध 28 अगस्त को समाप्त हुआ था.

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का बड़ा बयान !

लेकिन एक बार फिर डोकलाम विवाद सुलझने के बाद अब जो ख़बर आ रही है, वो बेहद चौंकाने वाली है. इस ख़बर के मुताबिक़ नए साल से ही चीन ने युद्ध की तैयारियां शुरू कर दी हैं और माना ये जा रहा है कि चीन का रुख अगर यही रहा तो भारत और चीन के बीच कभी भी जंग छिड़क सकती है. इस बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने एक बड़ा बयान दिया है.

बिपिन रावत ने कहा है कि भारत चीन से मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार है और चीन ने अगर युद्ध करने की गलती की तो भारत मुहंतोड़ जवाब देगा. आपकी जानकारी के लिए बता दे की चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग की तरफ से जारी आदेश के बाद चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने अपनी नौसेना, वायुसेना, मिसाइल और पुलिस बले के साथ घर तथा विदेश में सैन्य अभ्यास किया.

दुनिया की सबसे ज्यादा सैन्य शक्ति वाली चीन की 2.3 मिलियन आर्मी वाले पीएलए डेली ने दावा किया है कि 2018 की शुरूआत के साथ ही चीन ने अपने सबसे उन्नत सैन्य लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास करना को अभ्यास करना शुरू कर दिया है.उन्होने बताया है की इन लड़ाकू विमानो में जे-20, वाई -20 (ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट), एच-6के (बॉम्बर) तथा जे-16, जे-11बी, जे-10सी जैसे लड़ाकू को अभ्यास में शामिल किया गया हैं.

भारत और चीन के बीच एक लंबी एलएसी रेखा !

हालांकि इस बात की किसी को भी जानकारी नहीं है की ये लड़ाकू विमान किन जगहों पर अभ्यास कर रहे है. जानकारी के मुताबिक़ यह अभ्यास इसलिए किया जा रहा है ताकि लंबे समय तक सेना की क्षमता में सुधार हो सके, जिस ‘पठारी क्षेत्र’ में यह अभ्यास किया गया वह तिब्बती पठार में स्थित है. यह भारत और चीन के बीच एक लंबी एलएसी रेखा को कवर करता है.

सेना प्रमुख ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ‘अब समय आ गया है कि भारत अपना ध्यान उत्तरी सीमा की ओर केंद्रित करे. देश इसके साथ ही चीन की आक्रामकता से निपटने में भी सक्षम है. जनरल रावत ने अपने इस बयान से इशारा कर दिया है की चीन ही ताकतवर देश हो मगर इसका यह मतलब बिलकुल भी नहीं है की भारत कमजोर देश है.

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