इधर आप रयान स्कूल हत्याकांड में बीजी थे उधर बहुचर्चित आरुषि हत्याकांड पर आया फैसला,माँ-बाप कातिल नहीं तो फिर कातिल कौन ?

तलवार दंपति बरी लेकिन आरुषि को नहीं मिला इंसाफ !!

नोएडा के बहुचर्चित आरुषि-हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलवार दंपती को बरी कर दिया है. इस मामले में कोर्ट ने आरुषि के पैरेंट्स राजेश और नूपुर तलवार को 2013 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी लेकिन उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन दायर की थी. जिसके बाद आज  इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस बीके. नारायण और जस्टिस एके. मिश्रा की बेंच ने उन्हें बेजुनाह ठहराते हुए कहा था कि मौजूद सबूत तलवार दंपती को दोषी ठहराने में पर्याप्त नहीं है.

मौजूदा खबर अनुसार बता दें कि 2008 में हेमराज (45) की बॉडी आरुषि के मर्डर के एक दिन बाद तलवार दंपती की छत पर एक कूलर में मिली थी. हेमराज तलवार दंपती के घर पर काम करता था. इस केस की शुरुआती जांच में 3 नौकर और तलवार दंपति समेत कुल पांच लोगों को सस्पेक्ट माना गया था. तीनों नौकर सबूत न मिलने की वजह रिहा कर दिए. गौरतलब है कि तलवार दंपती दिल्ली-एनसीआर के जाने माने डेंटिस्ट रहे हैं.

क्या है मामला !!

  • बता दें कि 16 मई 2008 को दिल्ली से सटे नोएडा के जलवायु विहार स्थित घर में 14 साल की आरुषि का मर्डर कर दिया गया था.
  • आरुषि की हत्या गला रेत कर की गई थी. करीब साढ़े पांच साल चली जांच और सुनवाई के बाद सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने उसके माता-पिता नूपुर और राजेश तलवार को दोषी करार दिया था.
  • ये मामला काफी लंबे वक्त तक सुर्खियों में छाया रहा था. लोग आरुषि के कातिलों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे. उस वक्त उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी थी.

मर्डर केस की जांच में लगी सीबीआई की दो टीमें !!

  • सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह की टीम ने डॉ. तलवार के डेंटल क्लिनिक पर काम कर चुके कृष्णा, तलवार के नजदीकी दुर्रानी दंपती के नौकर राजकुमार और पड़ोस में काम करने वाले विजय मंडल को हत्याकांड का आरोपी माना.
  • इसके बाद केस की जांच सितंबर 2009 में सीबीआई की दूसरी टीम ने शुरू की करते हुए तीनों नौकरों को क्लीन चिट दी और साक्ष्यों के आधार पर तलवार दंपती को ही मुख्य आरोपी माना.
  • सीबीआई के मुताबिक वारदात के बाद आरुषि के शव को ढकने, बिस्तर पर चादर को ठीक करने, प्राइवेट पार्ट्स को साफ करने और हेमराज की बॉडी को छिपाने का काम कोई बाहरी नहीं करेगा.
  • सीबीआई टीम ने माना कि हेमराज का खून दंपती के कपड़ों पर नहीं मिला और साथ ही वारदात में  शामिल हथियार भी नहीं मिले.
  • तलवार दंपती पर किए गए साइंटिफिक टेस्ट भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके क्योंकि वारदात में सीधे तौर पर तलवार दंपती के शामिल होने के सबूत नहीं मिले जिसपर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई.

बताते चलें कि आज के फैसले से न केवल तलवार दंपति को राहत मिली है बल्कि सच्चाई की जीत भी हुई है. लेकिन इसके साथ-साथ एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर आरुषी की हत्या किसने की और क्यों, ये सवाल न केवल तलवार दंपति के लिए मुश्किल है बल्कि पुलिस वालों के लिए भी किसी मिस्ट्री से कम नहीं.